विज्ञापन

CBSE के नए मार्किंग सिस्टम को लेकर क्यों उठ रहे सवाल, कॉपी चेक करने का डिजिटल तरीका कितना सेफ?

Is CBSE Digital Marking Safe: CBSE बोर्ड 12वीं के रिजल्ट की तैयारी में जुटा है, लेकिन इस बार चर्चा का विषय 'ऑन-स्क्रीन मार्किंग' (OSM) सिस्टम बना हुआ है.

CBSE के नए मार्किंग सिस्टम को लेकर क्यों उठ रहे सवाल, कॉपी चेक करने का डिजिटल तरीका कितना सेफ?
CBSE On Screen Marking System को लेकर क्यों उठ रहे सवाल

Is CBSE Digital Marking Safe: सीबीएसई 12वीं के छात्र इन दिनों थोड़े टेंशन में हैं. एक तरफ रिजल्ट का इंतजार है, तो दूसरी तरफ चर्चा है कि इस बार कॉपियां डिजिटल तरीके से चेक हुई हैं. बोर्ड का कहना है कि इससे काम तेज और आसान हुआ है, तो कुछ लोगों का कहना है कि तकनीकी गड़बड़ियों की वजह से रिजल्ट में देरी हो सकती है. अगर आप भी इस साल 12वीं का एग्जाम दे चुके हैं, तो आपके लिए यह जानना बहुत जरूरी है कि कॉपी चेक करने का डिजिटल तरीका यानी ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) क्या है, कितना सेफ है और इससे जुड़े हर सवाल का जवाब..

ऑन-स्क्रीन मार्किंग क्या है

सालों से हम देखते आए हैं कि शिक्षक पेन लेकर कॉपियों का बंडल चेक करते थे, लेकिन 2026 में सीबीएसई ने 12वीं के लिए इस सिस्टम को बदल दिया है. आपने एग्जाम तो पेन-पेपर से ही दिया, लेकिन आपकी कॉपियों को स्कैन करके कंप्यूटर पर अपलोड कर दिया गया. अब टीचर के हाथ में कॉपी नहीं, बल्कि कंप्यूटर की स्क्रीन है. वह माउस और डिजिटल पेन की मदद से स्क्रीन पर ही आपकी आंसर शीट चेक कर रहे हैं.

ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर सवाल क्यों उठ रहे हैं

खबरों के मुताबिक, दिल्ली के कुछ बड़े स्कूलों के टीचर्स ने शिकायत की है कि नया डिजिटल पोर्टल बार-बार हैंग हो रहा है, सर्वर की समस्या है, स्कैन की गई कॉपियां लोड होने में बहुत समय ले रही हैं. टीचर्स को सिस्टम में लॉगिन करने में परेशानी आ रही है, जिससे चेकिंग की रफ्तार धीमी हो गई है. कुछ टीचर्स का कहना है कि बिजनेस स्टडीज और बायोलॉजी जैसे सब्जेक्ट्स की चेकिंग तकनीकी ग्लिच की वजह से देरी से शुरू हुई.

CBSE ने डिजिटल कॉपी चेकिंग को लेकर क्या सफाई दी

जब ऑन-स्क्रीन मार्किंग पर सवाल खड़े होने लगे, तो विवाद बढ़ा, जिसके बाद सीबीएसई को सफाई तक देनी पड़ी. बोर्ड के एग्जाम कंट्रोलर संयम भारद्वाज ने इन खबरों को दरकिनार करते हुए कहा है कि सिस्टम बहुत शानदार काम कर रहा है और बोर्ड को इस बदलाव पर गर्व है. उनके मुताबिक, रिजल्ट समय पर यानी मई के तीसरे हफ्ते तक आ सकता है.

डिजिटल चेकिंग के 3 बड़े फायदे

1. भले ही शुरुआत में कुछ तकनीकी दिक्कतें आ रही हों, लेकिन यह सिस्टम छात्रों के लिए अच्छा साबित हो सकता है. इसमें टोटल की गलती नामुमकिन सी है. अक्सर मैन्युअल चेकिंग में मार्क्स जोड़ने में गलती हो जाती थी. डिजिटल सिस्टम में कंप्यूटर खुद टोटल करता है, जिससे 1-2 नंबर कटने का डर खत्म हो गया है.

2. सिस्टम तब तक टीचर को आगे नहीं बढ़ने देता जब तक वह हर पेज और हर सवाल पर नंबर न दे दे, यानी अब कोई भी आंसर अन-चेक्ड नहीं रहेगा.

3. डिजिटल प्रोसेस होने की वजह से डेटा सीधे बोर्ड के पास पहुंचता है, जिससे रिजल्ट तैयार करने में लगने वाला समय 12 दिन से घटकर 8-9 दिन रह गया है.

ऑन-स्क्रीन मार्किंग में क्या री-चेकिंग का मौका मिलेगा

अगर रिजल्ट आने के बाद आपको लगता है कि आपके नंबर कम हैं, तो परेशान होने की जरुरत नहीं है. सीबीएसई ने साफ किया है कि री-चेकिंग और री-वैल्यूएशन की सुविधा पहले की तरह ही मिलती रहेगी. आप अपनी आंसर शीट की फोटोकॉपी भी मांग सकेंगे.

छात्रों को क्या करना चाहिए

फिलहाल आपको अफवाहों पर ध्यान देने की जरूरत नहीं है. 18 लाख से ज्यादा छात्र इस बार 12वीं की परीक्षा में बैठे हैं. आप सिर्फ अपना रोल नंबर और एडमिट कार्ड संभाल कर रखें. मई के दूसरे या तीसरे हफ्ते में रिजल्ट आ सकता है. ऑफिशियल वेबसाइट results.cbse.nic.in पर नजर बनाए रखें और यहीं से रिजल्ट भी देख सकते हैं. अगर किसी तरह की कोई प्रॉब्लम या नंबर कम लगते हैं, तो डायरेक्ट शिकायत कर सकते हैं.

NEET UG 2026 Paper: क्या नेशनल एजुकेशन पॉलिसी के मानकों पर खरा नहीं उतरा नीट का पेपर? जानें एक्सपर्ट की राय

NDTV.in पर ताज़ातरीन ख़बरों को ट्रैक करें, व देश के कोने-कोने से और दुनियाभर से न्यूज़ अपडेट पाएं

फॉलो करे:
Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com