AI solve physics formula : कल तक जिसे केवल एक मददगार टूल माना जाता था, आज उसने वैज्ञानिक शोध की पूरी परिभाषा ही बदल दी है. आर्टिफीसियल इंटेलिजेंस के नए मॉडल GPT-5.2 ने फिजिक्स (Physics) का एक ऐसा फार्मूला (Formula) पेश किया है, जिसे अब तक दुनिया के बड़े साइंटिस्ट भी हल करने में असमर्थ थे.
हार्वर्ड और कैम्ब्रिज ने लगाई मुहर
यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया (UCSB) के एक प्रोफेसर ने एआई (AI) द्वारा सुलझाए गए फार्मूला पर कहा कि यह सिर्फ डेटा को प्रोसेस करना नहीं है, बल्कि शुद्ध रूप से इंटलैक्चुअल क्रिएशन (Intellectual Creation) है. हम आज एक ऐसे दौर में प्रवेश कर चुके हैं, जहां AI केवल शोध में सहायता नहीं कर रहा, बल्कि वह खुद एक रिसर्चर बन गया है.
आपको बता दें कि एआई द्नारा सुलझाए गए फार्मूले को दुनिया के दो सबसे प्रतिष्ठित संस्थानों हार्वर्ड यूनिवर्सिटी और कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के विशेषज्ञों ने बारीकी से जांच की और इसे पूरी तरह सही पाया है.
GPT-5.2 just proposed a physics formula experts thought was impossible.
— Shawn Chauhan (@shawnchauhan1) February 16, 2026
Harvard and Cambridge verified it.
A UC Santa Barbara professor called it "journal-level research."
This isn't AI assistance. It's AI authorship.
The shift from "AI can't do science" to "of course it does"… pic.twitter.com/XWUX0q8CWT
ओरिजनल साइंटिफिक थियोरीज देगा AI
अभी तक माना जाता था कि AI केवल नेट पर मौजूद जानकारी को बटोरकर हमें पेश कर सकता है, लेकिन इस घटना ने साबित कर दिया है कि AI अब ओरिजनल साइंटिफिक थियोरीज (Original Scientific Theories) को जन्म भी दे सकता है. UC सांता बारबरा के विशेषज्ञों ने तो इसे "जर्नल-लेवल रिसर्च" करार दिया है.
''AI साइंस नहीं कर सकता" से "बेशक यह कर सकता है" में बदलाव आपकी सोच से भी ज्यादा तेजी से होगा. ज्यादातर सफलताएं चुपचाप हो जाती हैं, इससे पहले कि किसी को पता चले कि खेल बदल गया है.
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