दिल्ली होटल आग: 'फ्लरिश स्टे' के पास नहीं था फायर NoC, 21 की मौत; शटर काटकर बेसमेंट में घुसी टीम

दिल्ली के मालवीय नगर में बुधवार सुबह 'फ्लरिश स्टे' होटल में भीषण आग लगने से 21 लोगों की मौत हो गई. दमकल विभाग की 17 गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर 37 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला. जांच में सामने आया है कि इस पाँच मंजिला इमारत में कोई खिड़की नहीं थी और होटल बिना फायर NOC के अवैध रूप से चल रहा था. आग बेसमेंट से भड़की थी, जहां का शटर काटकर फायर ब्रिगेड अंदर दाखिल हुई थी.

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  • दिल्ली के मालवीय नगर स्थित होटल फ्लोरिश स्टे में आग लगने से 21 लोगों की मौत हुई जिसमें अधिकांश विदेशी नागरिक
  • आग की शुरुआत बेसमेंट से हुई जो बिना खिड़कियों और एक ही रास्ते वाली इमारत में तेजी से ऊपर फैल गई
  • दमकल विभाग ने 37 लोगों को सुरक्षित निकाला जबकि बेसमेंट का शटर काटकर अंदर फंसे छह लोगों को रेस्क्यू किया गया



दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में 3 जून 2026 की सुबह पांच मंज‍िला होटल फ्लरिश स्टे में आग लग गई, ज‍िससे 21 लोगों की जान चली गई. मरने वालों में अध‍िकांश व‍िदेशी नागर‍िक थे.  दमकल विभाग के अनुसार, उन्हें सुबह 8:50 बजे घटना की सूचना मिली, जिसके तुरंत बाद फायर ब्रिगेड की 17 गाड़ियां मौके पर पहुंचीं और राहत कार्य शुरू किया.

शटर काटकर बेसमेंट में घुसी टीम

फायर विभाग के चीफ ने बताया कि आग की शुरुआत बेसमेंट से हुई थी, जो धीरे-धीरे ऊपर की मंजिलों तक फैल गई. इस इमारत में कोई खिड़की नहीं थी और आने-जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था, जिसकी वजह से आग बेहद तेजी से फैली और लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला. बेसमेंट में भी लोग रह रहे थे और वहाँ का शटर बंद था. फायर ब्रिगेड ने शटर काटकर अंदर प्रवेश किया और वहां फंसे 6 लोगों को बाहर निकाला. दमकल विभाग ने सूझबूझ से काम लेते हुए इमारत से कुल 37 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला है.

जांच में बड़ा खुलासा

शुरुआती जांच में फायर डिपार्टमेंट ने एक बेहद गंभीर लापरवाही का खुलासा किया है. इस होटल के पास फायर डिपार्टमेंट की NOC यानी अनापत्ति प्रमाण पत्र नहीं था. फिलहाल राहत कार्य पूरा कर लिया गया है और मामले की आगे की जांच जारी है. 

विदेशी नागरिक और मरीज के मददगार बने हादसे का शिकार

हौजरानी की संकरी गलियों में स्थित 'फ्लोरिश इन' होटल में रहने वाले अधिकांश लोग विदेशी नागरिक थे. ये लोग दिल्ली के स्थानीय अस्पतालों में इलाज कराने आए मरीजों की देखभाल करने वाले अटेंडेंट (तीमारदार) थे. पाँच मंजिला इस इमारत के 25 कमरों में करीब 50 से अधिक लोग ठहरे हुए थे. हादसा सुबह के समय हुआ, जब ज्यादातर लोग गहरी नींद में थे और उन्हें संभलने का मौका तक नहीं मिला.

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एक ही रास्ता और बंद खिड़कियां: इस वजह से बढ़ गया खतरा

आग की शुरुआत होटल के बेसमेंट से हुई, जिसने देखते ही देखते ऊपर की मंजिलों को अपनी चपेट में ले लिया. इमारत की बनावट ऐसी थी कि उसमें खिड़कियों की भारी कमी थी और आने-जाने के लिए केवल एक ही संकरा रास्ता (एंट्री-एग्जिट) था. इस वजह से धुआं और जहरीली गैसें पूरी बिल्डिंग में फैल गईं. राहत और बचाव कार्य में सबसे बड़ी चुनौती यह रही कि बेसमेंट का मुख्य शटर पूरी तरह बंद था, जिसे कटर से काटकर दमकल कर्मियों को अंदर दाखिल होना पड़ा. नियमों के खिलाफ इस बेसमेंट में भी लोग रह रहे थे.

चश्मदीद शेफ की आपबीती: 'चूल्हा ऑन करते ही हुआ धमाका'

होटल के ग्राउंड फ्लोर पर चलने वाले रेस्टोरेंट के शेफ केसर नेगी इस भयानक हादसे में बाल-बाल बचे. उन्होंने बताया कि सुबह करीब 8 बजे जैसे ही उन्होंने खाना पकाने के लिए इलेक्ट्रिक चूल्हे का स्विच ऑन किया, अचानक एक जोरदार धमाका हुआ. हालांकि, बाद में उन्हें अहसास हुआ कि आग पहले से ही होटल में सुलग रही थी. नेगी ने तुरंत अपने सहायक को सतर्क किया और किसी तरह जान बचाकर बाहर भागे. बाहर आकर उन्होंने देखा कि पूरी इमारत आग की लपटों से घिरी हुई थी. (नोट: आग के आधिकारिक कारणों की पुष्टि होना अभी बाकी है).

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