दूधमुंहे बच्चों को सामान की तरह बेचने वाले गिरोह को AI से पकड़ा, गुजरात, दिल्ली से महाराष्ट्र तक फैला था जाल

ऑपरेशन ‘देव’ के तहत बनासकांठा पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से एक अंतरराज्यीय बाल तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है। इस मामले में मास्टरमाइंड मुरुगन समेत कई आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है.

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पुलिस की गिरफ्त में आरोपी
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  • बनासकांठा पुलिस ने बाल तस्करी के एक अंतरराज्यीय नेटवर्क का AI और तकनीकी निगरानी से भंडाफोड़ किया है
  • गिरोह के मास्टरमाइंड बोदाशु नगराजू को तेलंगाना के कागजनगर से गिरफ्तार किया गया है
  • मुरुगन और उसकी पत्नी ने पहले IVF इंडस्ट्री में काम किया फिर नवजात बच्चों की तस्करी शुरू की
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गुजरात के बनासकांठा जिले में पुलिस ने बाल तस्करी के एक बड़े नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है. इस मामले में मास्टरमाइंड समेत कई आरोपियों को भी गिरफ्तार किया गया है. ‘ऑपरेशन देव' नाम से चलाए गए इस अभियान में बनासकांठा पुलिस ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और तकनीकी निगरानी की मदद से उस गिरोह को तोड़ा, जो गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली और तेलंगाना में नवजात बच्चों की तस्करी कर रहा था. मामले की शुरुआत 6 अप्रैल को हुई, जब वडगाम के धनपूरा इलाके से चार साल के बच्चे देव का अपहरण कर लिया गया. लोकल क्राइम ब्रांच (LCB) ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बच्चे को सुरक्षित बरामद किया और तीन स्थानीय आरोपियों को गिरफ्तार किया. पूछताछ के दौरान यह मामला एक संगठित अंतर‑राज्यीय बाल तस्करी सिंडिकेट तक जा पहुंचा, जिसे पुलिस अधिकारियों ने “पैंडोरा बॉक्स” खुलने जैसा बताया.

AI की मदद से मास्टरमाइंड तक पहुंच

रेंज IG पर्शिता राठौड़ और SP प्रशांत सुम्बे के नेतृत्व में पुलिस ने AI और तकनीकी खुफिया जानकारी का इस्तेमाल करते हुए गिरोह के सरगना बोदाशु नगराजू उर्फ मुरुगन का पता लगाय. फिर उसे तेलंगाना के कागजनगर से गिरफ्तार किया गया. पालनपुर से भेजी गई विशेष टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ मिलकर मुरुगन समेत उसके दो मुख्य सहयोगियों कसारपु तिरुपति और केलेटि गंगाधर को हिरासत में लिया.

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IVF से तस्करी तक का सफर

जांच में सामने आया कि मुरुगन और उसकी पत्नी पहले IVF इंडस्ट्री से जुड़े थे. वे स्वस्थ महिलाओं की पहचान कर अंडा दान और सरोगेसी के लिए कमीशन पर काम करते थे. बाद में उन्होंने नवजात बच्चों की अवैध बिक्री को कहीं अधिक मुनाफे का जरिया बनाते हुए अपराध का रास्ता अपना लिया. इसके लिए देश के बड़े शहरों में एजेंटों का नेटवर्क खड़ा किया गया. नवजात शिशुओं को कमजोर परिवारों से या अपहरण के जरिए हासिल कर ₹4 लाख से ₹5 लाख प्रति बच्चे के हिसाब से निःसंतान दंपतियों या बिचौलियों को बेचा जाता था. पुलिस के अनुसार, अब तक 8 नवजात बच्चों की तस्करी की पुष्टि हुई है. इनमें गुजरात (बनासकांठा) – 2, महाराष्ट्र (मुंबई) – 2, तेलंगाना (हैदराबाद) – 3, दिल्ली – 1 से है.

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बरामदगी और गिरफ्तारियां

मुंबई‑वडोदरा हाईवे पर पकड़े गए एक एजेंट से पुलिस ने ₹1.50 लाख नकद बरामद किए हैं, जिसे हालिया बिक्री की रकम माना जा रहा है. तीन स्थानीय अपहरणकर्ताओं के अलावा तीन अंतर‑राज्यीय हैंडलर फिलहाल पुलिस की हिरासत में हैं. वहीं, मुंबई और हैदराबाद में 4‑5 अन्य एजेंटों की पहचान की गई है, जो अभी फरार हैं. इस मामले में वडगाम और दांता थानों में अपहरण और बाल तस्करी से जुड़े प्रावधानों के तहत FIR दर्ज की गई है. एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “यह एक बेहद संगठित सिंडिकेट था, जो बच्चों को सामान की तरह बेच रहा था. AI और अंतर‑राज्यीय समन्वय के जरिए हम मुरुगन गिरोह की रीढ़ तोड़ने में कामयाब रहे, जिसका महाराष्ट्र में भी पहले से आपराधिक इतिहास रहा है.”

फिलहाल बनासकांठा पुलिस कई राज्यों की चाइल्ड वेलफेयर कमेटियों के साथ मिलकर उन आठ बच्चों की तलाश और सुरक्षित पुनर्वास की प्रक्रिया में जुटी है, जिन्हें इस गिरोह ने बेचा था.

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