24 करोड़ के मनरेगा घोटाले में ED ने दाखिल की सप्लीमेंट्री चार्जशीट, IAS पूजा सिंघल समेत नेटवर्क पर कसा शिकंजा

झारखंड के खूंटी जिले में मनरेगा समेत सरकारी योजनाओं में हुए घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय ने PMLA कोर्ट में चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है। इस चार्जशीट में पांच नए आरोपियों को शामिल किया गया है.

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  • झारखंड के खूंटी जिले में मनरेगा सहित सरकारी योजनाओं में करोड़ों रुपये के घोटाले की ED द्वारा जांच जारी
  • ED ने इस मामले में CA, LLP कंपनी और अन्य आरोपियों के खिलाफ चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट PMLA कोर्ट में दाखिल की
  • जांच में पाया गया कि तत्कालीन डिप्टी कमिश्नर IAS पूजा सिंघल इस घोटाले की मुख्य लाभार्थी थीं और कमीशन लेती थीं
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झारखंड के खूंटी जिले में मनरेगा समेत अन्य सरकारी योजनाओं में हुए बड़े घोटाले को लेकर ED की जांच लगातार आगे बढ़ रही है. आज ED के रांची जोनल ऑफिस ने PMLA कोर्ट में इस मामले में चौथी सप्लीमेंट्री चार्जशीट दाखिल की है. इस चार्जशीट में अमिता झा, सिद्धार्थ सिंघल, राधेश्याम फायरवर्क्स एलएलपी, पवन कुमार सिंह और कमलेश सिंघल को आरोपी बनाया गया है. ED ने कोर्ट से यह भी अनुरोध किया है कि रांची के बोड़िया मौजा में स्थित 17 डिसमिल जमीन, जिसकी कीमत करीब 1.33 करोड़ रुपये बताई गई है और जिसे कथित तौर पर घोटाले के पैसों से खरीदा गया था, उसे जब्त किया जाए.

16 FIR के आधार पर शुरू हुई थी जांच

इस पूरे मामले की जांच झारखंड पुलिस और विजिलेंस ब्यूरो द्वारा दर्ज 16 FIR के आधार पर ही शुरू हुई थी. वहीं जांच में सामने आया कि वर्ष 2009 से 2011 के बीच खूंटी जिले में विकास कार्यों के लिए करीब 24 करोड़ रुपये जारी किए गए थे, लेकिन इनमें से लगभग 18.06 करोड़ रुपये फर्जी और बेहद घटिया काम दिखाकर हड़प लिए गए.

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IAS पूजा सिंघल पर मुख्य लाभार्थी होने का आरोप

ED की जांच में यह भी सामने आया कि उस समय खूंटी की डिप्टी कमिश्नर रहीं IAS पूजा सिंघल इस पूरे घोटाले की मुख्य लाभार्थी में थीं. आरोप है कि वह हर प्रोजेक्ट के बदले करीब 5 प्रतिशत कमीशन लेती थीं और संबंधित अधिकारियों को बचाने का काम करती थीं. ED के अनुसार, घोटाले की रकम को बाद में फर्जी कंपनियों, परिवार के सदस्यों और बेनामी नेटवर्क के जरिए घुमाकर निवेश किया गया.

पहले ही कई आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल

इससे पहले ED पूजा सिंघल, उनके पति अभिषेक झा, चार्टर्ड अकाउंटेंट सुमन कुमार और पल्स संजीवनी हेल्थकेयर प्राइवेट लिमिटेड समेत आठ आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर चुकी है. मामले की जांच में यह भी सामने आया कि अमिता झा ने अपने बैंक खातों के जरिए करीब 20.70 लाख रुपये की अवैध रकम को घुमाया और उसे कंपनी में शेयर कैपिटल के रूप में निवेश किया, साथ ही रांची के बरियातू इलाके में एक प्राइम प्लॉट भी खरीदा.

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फर्जी कंपनियों के जरिए जमीन खरीदने का आरोप

जांच के दौरान सिद्धार्थ सिंघल के मोबाइल की फोरेंसिक जांच में व्हाट्सऐप चैट सामने आई, जिससे मालूम हुआ कि राधेश्याम फायरवर्क्स एलएलपी नाम की कंपनी खासतौर पर पूजा सिंघल के फायदे के लिए बनाई गई थी. इसी कंपनी के जरिए जमीन खरीदी गई. पवन कुमार सिंह और कमलेश सिंघल को इस कंपनी में नाममात्र का पार्टनर बनाकर असली मालिकाना हक छिपाने का आरोप है.

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छापेमारी में 19 करोड़ से ज्यादा की नकदी बरामद

जांच के दौरान 6 मई 2022 को कुल 24 ठिकानों पर छापेमारी की गई थी. इस दौरान सीए सुमन कुमार के घर से करीब 17.49 करोड़ रुपये नकद और एक अन्य सहयोगी के यहां से 1.82 करोड़ रुपये बरामद हुए थे. इस तरह कुल करीब 19.31 करोड़ रुपये की नकदी जब्त की गई थी. इसके अलावा कई अहम दस्तावेज, बैंक रिकॉर्ड और डिजिटल सबूत भी ED को मिले हैं.

संपत्तियां अटैच, जांच अब भी जारी

ED इस मामले में आरोपियों की संपत्तियों को पहले ही अस्थायी रूप से अटैच कर चुकी है, जिसे बाद में PMLA अथॉरिटी ने कन्फर्म भी कर दिया है. फिलहाल इस पूरे घोटाले में जांच जारी है और ED मनी ट्रेल और नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही है.

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