308 करोड़ का MLM पोंजी घोटाला: 16,927 निवेशकों से ठगी, ED ने कंपनी और डायरेक्टर्स के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की

ईडी ने झारखंड के बड़े एमएलएम पोंजी घोटाले में Maxizone Touch Pvt. Ltd. और उसके डायरेक्टर्स चंदर भूषण सिंह व स्म्ति प्रियंका के खिलाफ PMLA के तहत रांची की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की.

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लैपटॉप से मिले डिजिटल सबूतों की फॉरेंसिक जांच में घोटाले की असली तस्वीर सामने आई
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  • ED ने Maxizone Touch Pvt Ltd और उसके डायरेक्टर्स के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून के तहत चार्जशीट दाखिल की
  • 16,927 निवेशकों से करीब 308 करोड़ रुपये जुटाकर लाइफटाइम हर महीने पंद्रह प्रतिशत रिटर्न का झांसा देकर ठगी
  • जांच में पता चला कि कंपनी कोई वास्तविक व्यापार नहीं कर रही थी, बल्कि यह एक पोंजी स्कीम थी
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झारखंड में सामने आए बड़े MLM पोंजी घोटाले में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने Maxizone Touch Pvt. Ltd. और उसके डायरेक्टर्स चंदर भूषण सिंह और स्म्ति प्रियंका के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत रांची की विशेष अदालत में चार्जशीट दाखिल की है. ईडी के अनुसार, इस घोटाले में 16,927 निवेशकों से करीब 308 करोड़ रुपये जुटाए गए. इसके अलावा 12 फरवरी 2026 को जारी अस्थायी कुर्की आदेश के तहत करीब 11 करोड़ रुपये की संपत्तियां अटैच की गई हैं.

हाई रिटर्न का झांसा देकर ठगा

जांच की शुरुआत झारखंड पुलिस द्वारा जमशेदपुर के साकची और गोविंदपुर थानों में दर्ज FIR के आधार पर हुई. आरोप है कि कंपनी ने लोगों को ‘लाइफटाइम हर महीने 15% रिटर्न' का लालच दिया. बड़ी संख्या में लोगों ने निवेश किया, लेकिन कुछ समय बाद भुगतान अचानक बंद हो गया और दोनों आरोपी फरार हो गए. 3 मार्च 2023 को दोनों को घोषित अपराधी घोषित किया गया.

ईडी की जांच में क्या कुछ पता चला

ईडी की जांच में सामने आया कि कंपनी कोई वास्तविक ट्रेडिंग या व्यवसाय नहीं कर रही थी. यह एक क्लासिक पोंजी स्कीम थी. नए निवेशकों से पैसा लेकर पुराने निवेशकों को रिटर्न दिया जाता था, ताकि भरोसा बना रहे और और लोग फंसते जाएं. आरोपियों ने खुद को NSE का अधिकृत व्यक्ति बताकर लोगों को गुमराह किया. वहीं RBI ने साफ किया कि कंपनी के पास NBFC रजिस्ट्रेशन नहीं था, यानी जमा लेना शुरू से ही गैरकानूनी था.

डिजिटल सबूतों से खुली पोल

चंदर भूषण सिंह के लैपटॉप से मिले डिजिटल सबूतों की फॉरेंसिक जांच में घोटाले की असली तस्वीर सामने आई. जांच में पता चला कि 16,927 निवेशकों से लगभग 307.95 करोड़ रुपये की ‘प्रोसीड्स ऑफ क्राइम' जुटाई गईं. ईडी को 21 बैंक खातों में कुल 521.45 करोड़ रुपये का क्रेडिट मिला, जिसमें से 249.69 करोड़ रुपये रिटर्न के नाम पर घुमाए गए, जबकि 58.27 करोड़ रुपये रियल एस्टेट, सोने के आभूषण और क्रिप्टोकरेंसी में निवेश किए गए, ताकि काले धन को वैध दिखाया जा सके.

फर्जी आधार बनवाकर देता रहा चकमा

जांच में यह भी खुलासा हुआ कि फरार रहने के दौरान आरोपी ने दीपक सिंह के नाम से फर्जी आधार कार्ड बनवाया ताकि कानून से बचा जा सके. ईडी ने इस मामले में तीन चरणों में सर्च अभियान चलाया. पांच राज्यों में 27 ठिकानों पर छापेमारी के दौरान कई अहम दस्तावेज़, डिजिटल डिवाइस, सोने के गहने, 14,757 USDT और 10 लाख रुपये नकद बरामद किए गए. इससे पहले, 16 दिसंबर 2025 को ईडी ने PMLA की धारा 19 के तहत दोनों डायरेक्टर्स को गिरफ्तार किया था. फिलहाल दोनों रांची की बिरसा मुंडा सेंट्रल जेल में न्यायिक हिरासत में हैं.

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