जम्मू-कश्मीर के गुरु 'द्रोण' का करिश्मा और यूं टीम ने तोड़ दिया 67 साल का चक्रव्यूह

Jammu and Kashmir Script Ranji Trophy History: बारामूला की गलियों से निकले नबी ने वो कर दिखाया जिसका सपना जम्मू कश्मीर के लोगों ने सालों से देखा होगा.28 साल के नबी ने जीत के बाद कहा कि उनकी टीम इस जीत की हकदार थी

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67 साल का इंतजार खत्म, जम्मू-कश्मीर पहली बार रणजी ट्रॉफी फाइनल में पहुंची

जम्मू कश्मीर की टीम ने 67 साल बाद रणजी ट्रॉफी के फाइनल में जगह बना ली है. जम्मू कश्मीर के लिए यहां तक पहुंचना आसान नहीं था. इसके पीछे उनके कोच कोच अजय शर्मा का भी अहम योगदान रहा. कोच अजय शर्मा जो खुद भारत के लिए खेल चुके हैं उन्होंने जम्मू कश्मीर की टीम को फाइनल में पहुंचाने के लिए पर्दे की पीछे खूब मेहनत की. जिसका फल आज इस टीम को मिला है. कोच की गाइडेंस में आज जम्मू कश्मीर ने 67 साल के चक्रव्यूह को तोड़कर फाइनल में जगह बनाई है. आईए जानते हैं कि कैसे जम्मू कश्मीर ने 67 साल बाद इतिहास रचा.

सेमीफाइनल में बंगाल को 6 विकेट से हराकर फाइनल में पहुंची जम्मू कश्मीर

जम्मू कश्मीर ने रणजी ट्राफी के सेमीफाइनल में बंगाल को 6 विकेट से हरा दिया और फाइनल में प्रवेश किया.यह कारनामा करने में जम्मू कश्मीर को 67 साल लग गए.जम्मू कश्मीर ने 1959-60 में रणजी ट्राफी खेलना शुरू किया,2013-14 में पहली बार नॉकआउट में पहुंचे और इस साल दो बार के रणजी चैंपियन बंगाल को हरा दिया.बंगाल की टीम में कई सितारे थे जैसे अभिमन्यू ईश्वरन जैसे बल्लेबाज साथ में तीन ऐसे गेंदबाज जो भारत खेल चुके हैं जैसे मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार और आकाशदीप.इनके अलावा बंगाल के तरफ से एस के गिरामी ने एक शतकीय पारी भी खेली.मोहम्मद शमी ने शानदार गेंदबाज़ी की और कुल 9 विकेट भी लिए जिसमें 8 तो एक ही पारी में थे..मगर मैच के हीरो और मैन ऑफ दी मैच रहे जम्मू कश्मीर टीम के आकिब नबी जिन्होंने 143 रन देकर 9 विकेट लिए और 42 रन भी बनाए.

आकिब ने पहली पारी में 5 और दूसरी पारी में 4 विकेट लिए.आकिब नबी को क्रिकेट खेलने का प्रोत्साहन उनकी दादी से मिला.बारामूला की गलियों से निकले नबी ने वो कर दिखाया जिसका सपना जम्मू कश्मीर के लोगों ने सालों से देखा होगा.28 साल के नबी ने जीत के बाद कहा कि उनकी टीम इस जीत की हकदार थी.

नबी ने रणजी के इस सत्र में कुल 55 विकेट लिए हैं.जम्मू कश्मीर के कोच अजय शर्मा भी अपने जमाने में अच्छे खिलाड़ी रहे हैं और दिल्ली के लिए खेलते थे.एक स्पिनर के तौर पर उन्होंने भारत के लिए भी खेला है.उन्होंने जम्मू कश्मीर की टीम में पारस डोगरा और अब्दुल समद को जोड़ा और स्थानीय खिलाड़ियों को साथ मिलाकर टीम तैयार की.जम्मू कश्मीर टीम के कप्तान पारस डोगरा ने भी इस मैच में ही अपने रणजी ट्रॉफ़ी कैरियर के दस हजार रन भी पूरे किए..वहीं वंशराज शर्मा ने भी 43 रन की अच्छी पारी खेली.

ये भी पढ़ें- 'वह डीजल इंजन की तरह है', जम्मू-कश्मीर के आकिब नबी की गेंदबाजी देख गदगद हैं इरफान पठान, कर दी यह भविष्यवाणी

एक और दिलचस्प बात है कि ये मैच बंगाल के कल्याणी जो कि नादिया जिले में है वहां खेला गया .जम्मू कश्मीर का फाइनल में मुकाबला कनार्टक और उत्तराखंड के मैच के विजेता से होगा जिसमें कनार्टक के जीतने की संभावना है.रणजी ट्रॉफ़ी मुक़ाबले में देश भर की 38 टीमें हिस्सा लेती हैं. कश्मीर ने 67 साल बाद रचा इतिहास,बंगाल को हरा कर रणजी ट्राफी के फाइनल में पहुंचे. 

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फाइनल में पहुंचा जम्मू कश्मीर

जम्मू कश्मीर ने रणजी ट्राफी के सेमीफाइनल में बंगाल को 6 विकेट से हरा दिया और फाइनल में प्रवेश किया.यह कारनामा करने में जम्मू कश्मीर को 67 साल लग गए.जम्मू कश्मीर ने 1959-60 में रणजी ट्राफी खेलना शुरू किया,2013-14 में पहली बार नॉकआउट में पहुंचे और इस साल दो बार के रणजी चैंपियन बंगाल को हरा दिया.बंगाल की टीम में कई सितारे थे जैसे अभिमन्यू ईश्वरन जैसे बल्लेबाज साथ में तीन ऐसे गेंदबाज जो भारत खेल चुके हैं जैसे मोहम्मद शमी, मुकेश कुमार और आकाशदीप.इनके अलावा बंगाल के तरफ से एस के गिरामी ने एक शतकीय पारी भी खेली.

मोहम्मद शमी ने शानदार गेंदबाज़ी की और कुल 9 विकेट भी लिए जिसमें 8 तो एक ही पारी में थे..मगर मैच के हीरो और मैन ऑफ दी मैच रहे जम्मू कश्मीर टीम के आकिब नबी जिन्होंने 143 रन देकर 9 विकेट लिए और 42 रन भी बनाए.आकिब ने पहली पारी में 5 और दूसरी पारी में 4 विकेट लिए.आकिब नबी को क्रिकेट खेलने का प्रोत्साहन उनकी दादी से मिला.बारामूला की गलियों से निकले नबी ने वो कर दिखाया जिसका सपना जम्मू कश्मीर के लोगों ने सालों से देखा होगा.28 साल के नबी ने जीत के बाद कहा कि उनकी टीम इस जीत की हकदार थी. नबी ने रणजी के इस सत्र में कुल 55 विकेट लिए हैं.

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जम्मू कश्मीर के कोच अजय शर्मा के अथक प्रयास से मिली मंजिल

जम्मू कश्मीर के कोच अजय शर्मा भी अपने जमाने में अच्छे खिलाड़ी रहे हैं और दिल्ली के लिए खेलते थे.एक स्पिनर के तौर पर उन्होंने भारत के लिए भी खेला है.उन्होंने जम्मू कश्मीर की टीम में पारस डोगरा और अब्दुल समद को जोड़ा और स्थानीय खिलाड़ियों को साथ मिलाकर टीम तैयार की.जम्मू कश्मीर टीम के कप्तान पारस डोगरा ने भी इस मैच में ही अपने रणजी ट्रॉफ़ी कैरियर के दस हजार रन भी पूरे किए..वहीं वंशराज शर्मा ने भी 43 रन की अच्छी पारी खेली.

एक और दिलचस्प बात है कि ये मैच बंगाल के कल्याणी जो कि नादिया जिले में है वहां खेला गया .जम्मू कश्मीर का फाइनल में मुकाबला कनार्टक और उत्तराखंड के मैच के विजेता से होगा जिसमें कनार्टक के जीतने की संभावना है.रणजी ट्रॉफ़ी मुक़ाबले में देश भर की 38 टीमें हिस्सा लेती हैं.

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