
NEET 2018 में तीसरी रैंक हासिल करने वाले हिमांशु शर्मा (फाइल फोटो)
नई दिल्ली:
4 जून 2018 को सीबीएसई ने NEET 2018 के नतीजे घोषित कर दिए जिसमें दिल्ली के हिमांशु शर्मा को तीसरी रैंक हासिल हुई है. हिमांशु शर्मा को डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम की एक बात दिल से छू गयी जिसने उनके जीवन की दिशा को बदल दिया. जब भी वह पढ़ाई करते-करते थक जाते या कभी उन्हें निराशा होती तो वह वह एपीजे अब्दुल कलाम के इन शब्दों को याद करते, "सपने वो नहीं जो हम बंद आंखों से देखते हैं बल्कि सपने वो हैं जो आपको सोने न दें". इसके बारे में सोचकर वो फिर से उठ जाते और मेहनत में लग जाते. वो मेहनत और लगन रंग लायी और उन्होंने वो मुकाम हासिल किया जिसका सपना उन्होंने बचपन से देखा था.
जब NDTV ने उनसे बात की और उनकी सफलता का मंत्र पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्होंने दो साल सोशल मीडिया से एकदम दूरी बनाये रखी और वो और स्टूडेंट्स को भी यही सलाह देते हैं कि हम मस्ती और सोशल मीडिया का इस्तेमाल बाद में भी कर सकते हैं, परन्तु सोशल मीडिया की वजह से रैंक नहीं ख़राब कर सकते हैं. आपको ज़िन्दगी में प्राथिमिकता किस चीज को देनी है ये आपको पहले निर्धारित करना पड़ेगा तभी आप अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं.
हिमांशु से जब हमने यह जानने की कोशिश की कि उन्होंने बारहवीं और नीट एग्जाम की तैयारी साथ-साथ कैसे की तो उन्होंने बताया कि अगर आप अच्छी रैंक लाना चाहते हैं तो आपको NCERT की किताबों को बहुत अच्छे से पढ़ना होगा और कांसेप्ट को समझना होगा. उन्हें इसलिए दिक्कत नहीं हुई क्योंकि उन्होंने हर बार अपनी गलतियों से सीखा और अगले एग्जाम में बेहतर स्कोर हासिल किया. वह कभी भी किसी डाउट को मन में नहीं रखते थे और टीचर्स से पूछकर अपनी सारी समस्याओं का अंत साथ ही साथ करते रहते थे.
हिमांशु का मानना है कि निरंतर प्रैक्टिस करते रहने से और टेस्ट सीरीज ज्वाइन करने से एग्जाम से पहले ही इतना कॉन्फिडेंस आ जाता है कि गलतियों की संभावनाएं कम हो जाती हैं. हिमांशु कहते हैं कि टाइम मैनजमेंट का आना भी बेहद जरूरी है ताकि नीट के एग्जाम में आपके पास इतना टाइम भी रहे कि आप ओएमआर शीट भी अच्छे से भर सकें. हिमांशु ने ये भी बताया कि उन्होंने पहले भी टेस्ट दिए थे जिसमें उनसे बहुत सी गलतियां होती थीं, जिसे उन्होंने प्रैक्टिस से सुधारा और आख़िरकार टॉप रैंक हासिल की.
गौरतलब है कि सीबीएसई ने इस साल 6 मई 2018 को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) का आयोजन किया था. यह टेस्ट देशभर के सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर दाखिले के लिए सिंगल विंडो एग्जाम है. हालांकि, इस टेस्ट में एम्स और JIPMER संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया शामिल नहीं है.
VIDEO: डॉक्टरी पढ़ने विदेश जाने वालों को भी पास करना होगा NEET
जब NDTV ने उनसे बात की और उनकी सफलता का मंत्र पूछा तो उन्होंने बताया कि उन्होंने दो साल सोशल मीडिया से एकदम दूरी बनाये रखी और वो और स्टूडेंट्स को भी यही सलाह देते हैं कि हम मस्ती और सोशल मीडिया का इस्तेमाल बाद में भी कर सकते हैं, परन्तु सोशल मीडिया की वजह से रैंक नहीं ख़राब कर सकते हैं. आपको ज़िन्दगी में प्राथिमिकता किस चीज को देनी है ये आपको पहले निर्धारित करना पड़ेगा तभी आप अपना लक्ष्य हासिल कर सकते हैं.
हिमांशु से जब हमने यह जानने की कोशिश की कि उन्होंने बारहवीं और नीट एग्जाम की तैयारी साथ-साथ कैसे की तो उन्होंने बताया कि अगर आप अच्छी रैंक लाना चाहते हैं तो आपको NCERT की किताबों को बहुत अच्छे से पढ़ना होगा और कांसेप्ट को समझना होगा. उन्हें इसलिए दिक्कत नहीं हुई क्योंकि उन्होंने हर बार अपनी गलतियों से सीखा और अगले एग्जाम में बेहतर स्कोर हासिल किया. वह कभी भी किसी डाउट को मन में नहीं रखते थे और टीचर्स से पूछकर अपनी सारी समस्याओं का अंत साथ ही साथ करते रहते थे.
हिमांशु का मानना है कि निरंतर प्रैक्टिस करते रहने से और टेस्ट सीरीज ज्वाइन करने से एग्जाम से पहले ही इतना कॉन्फिडेंस आ जाता है कि गलतियों की संभावनाएं कम हो जाती हैं. हिमांशु कहते हैं कि टाइम मैनजमेंट का आना भी बेहद जरूरी है ताकि नीट के एग्जाम में आपके पास इतना टाइम भी रहे कि आप ओएमआर शीट भी अच्छे से भर सकें. हिमांशु ने ये भी बताया कि उन्होंने पहले भी टेस्ट दिए थे जिसमें उनसे बहुत सी गलतियां होती थीं, जिसे उन्होंने प्रैक्टिस से सुधारा और आख़िरकार टॉप रैंक हासिल की.
गौरतलब है कि सीबीएसई ने इस साल 6 मई 2018 को नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) का आयोजन किया था. यह टेस्ट देशभर के सभी मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एमबीबीएस और बीडीएस सीटों पर दाखिले के लिए सिंगल विंडो एग्जाम है. हालांकि, इस टेस्ट में एम्स और JIPMER संस्थानों में दाखिले की प्रक्रिया शामिल नहीं है.
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