
आईआईटी-रुड़की
रुड़की:
भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान-रुड़की (आईआईटी-रुड़की) का इरादा अगले साल तक 100 उद्यमी देने का है। संस्थान अपने परिसर को नवोन्मेषी हब बना रहा है। इसके अलावा संस्थान ऐसा पारिस्थितिकी तंत्र विकसित कर रहा है कि जिससे उसके पुराने विद्यार्थियों का नेटवर्क छात्रों को विचार से लेकर क्रियान्वयन के लिए छात्रों के मार्गदर्शन को एक संरक्षक की भूमिका निभा सके।
कॉलेज के प्रौद्योगिकी समारोह ‘कॉग्निजेंस 2016’ के पहले दिन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने शुक्रवार को संस्थान के परिसर में ‘टिंकरिंग लैब’ का उद्घाटन किया। पर्रिकर ने इस मौके पर वहां प्रदर्शित माडलों को भी देखा।
जैसा कि नाम से पता चलता है टिंकरिंग लैब ऐसा स्थान हैं जहां छात्र विचारों बिना किसी निश्चित एजेंडा के विचारों को संवार सकते हैं यानी उन्हें आगे बढ़ा सकते हैं।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रदिप्त बनर्जी ने कहा, ‘‘एक बार इन विचारों को किसी प्रकार का आकार मिलने के बाद इन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है।’’ समारोह में अपने शुरुआती संबोधन में बनर्जी ने कहा कि कोई भी सोच या विचार तीन स्तंभों-सिद्धान्त, अभ्यास और नवोन्मेषण पर टिकी होती है। पर्रिकर ने उसमें चौथा स्तंभ जोड़ा है जो कि नवोन्मेषण का पारिस्थितिकी तंत्र है।
रक्षा मंत्रालय पहले ही डीआरडीओ और उसके तहत अन्य संगठनों के कुछ आईआईआई, एनआईटी, आईआईएससी तथा अन्य शीर्ष संस्थानों के साथ सहयोग की पहल को आगे बढ़ा चुका है।
दीक्षांत समारोह हॉल में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा पर्रिकर ने कुछ अलग हटकर सोचने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के रूप में आपको भारत की वृद्धि की कहानी में योगदान करना चाहिए और नवोन्मेषी विचार पेश करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हॉल दूसरे विश्व युद्ध में हैंगर था और एक शानदार हॉल है। नवोन्मेषण का सिद्धान्त यहां पहले से दिख रहा है।
कॉलेज के प्रौद्योगिकी समारोह ‘कॉग्निजेंस 2016’ के पहले दिन रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने शुक्रवार को संस्थान के परिसर में ‘टिंकरिंग लैब’ का उद्घाटन किया। पर्रिकर ने इस मौके पर वहां प्रदर्शित माडलों को भी देखा।
जैसा कि नाम से पता चलता है टिंकरिंग लैब ऐसा स्थान हैं जहां छात्र विचारों बिना किसी निश्चित एजेंडा के विचारों को संवार सकते हैं यानी उन्हें आगे बढ़ा सकते हैं।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रदिप्त बनर्जी ने कहा, ‘‘एक बार इन विचारों को किसी प्रकार का आकार मिलने के बाद इन्हें आगे बढ़ाया जा सकता है।’’ समारोह में अपने शुरुआती संबोधन में बनर्जी ने कहा कि कोई भी सोच या विचार तीन स्तंभों-सिद्धान्त, अभ्यास और नवोन्मेषण पर टिकी होती है। पर्रिकर ने उसमें चौथा स्तंभ जोड़ा है जो कि नवोन्मेषण का पारिस्थितिकी तंत्र है।
रक्षा मंत्रालय पहले ही डीआरडीओ और उसके तहत अन्य संगठनों के कुछ आईआईआई, एनआईटी, आईआईएससी तथा अन्य शीर्ष संस्थानों के साथ सहयोग की पहल को आगे बढ़ा चुका है।
दीक्षांत समारोह हॉल में छात्रों को संबोधित करते हुए कहा पर्रिकर ने कुछ अलग हटकर सोचने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थी के रूप में आपको भारत की वृद्धि की कहानी में योगदान करना चाहिए और नवोन्मेषी विचार पेश करने चाहिए। उन्होंने कहा कि यह हॉल दूसरे विश्व युद्ध में हैंगर था और एक शानदार हॉल है। नवोन्मेषण का सिद्धान्त यहां पहले से दिख रहा है।
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