खास बातें
- दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को याहू इंडिया की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें मांग की गई थी कि वेबसाइट पर आपत्तिजनक सामग्री रखने वाले वेबसाइटों की सूची में से उसके नाम को बाहर किया जाए।
नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत ने सोमवार को याहू इंडिया की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें मांग की गई थी कि वेबसाइट पर आपत्तिजनक सामग्री रखने वाले वेबसाइटों की सूची में से उसके नाम को बाहर किया जाए। इसके साथ ही शिकायतकर्ता पर 5000 रुपये का जुर्माना लगाया गया।
अदालत ने शिकायकर्ता मुफ्ती ऐजाज अर्शद कासमी की याचिका खारिज कर दी, जिन्होंने याहू इंडिया सहित 20 वेबसाइटों से आपत्तिजनक सामग्री हटवाने की मांग की थी। कासमी इस्लामिक पीस फाउंडेशन द्वारा संचालित एक वेबसाइट से जुड़े हैं।
याहू इंडिया ने एडमिनिस्ट्रेटिव सिविल जज परवीन सिंह से अनुरोध किया कि आरोपी वेबसाइटों की सूची से उसका नाम निकाला जाए। उसने अदालत से कहा कि उसके वेबसाइट पर कोई आपत्तिजनक सामग्री नहीं है।
दिल्ली उच्च न्यायालय ने दो मार्च को याहू इंडिया पर लगाए गए आपराधिक आरोप को रद्द कर दिया।
दीवानी अदालत ने एक मार्च को माइक्रोसॉफ्ट इंडिया की उस याचिका को स्वीकार कर लिया, जिसमें इस मामले से अपना नाम हटाए जाने की मांग की थी।
याहू इंडिया ने अपने बयान में कहा कि उसके खिलाफ कोई आरोप नहीं लगाया गया है और न ही किसी सामग्री का जिक्र किया गया है।
याहू इंडिया ने अपने बयान में कहा कि शिकायकर्ता ने शायद इस भ्रम में उसका नाम अन्य सोशल नेटवर्किंग साइट के साथ जोड़ दिया कि याहू इंडिया भी एक सोशल नेटवर्किंग साइट है।
कासमी द्वारा बताई गई अन्य कम्पनियों पर सुनवाई जारी रहेगी। इनमें फेसबुक और गूगल इंडिया ने अपना बयान अदालत में दाखिल कर दिया है।