क्या था 2009 सत्यम घोटाला? खास बातें जानें

सत्यम के संस्थापक बी रामालिंग राजू को 9 और आरोपियों के साथ 2009 के सत्यम घोटाले में दोषी पाया गया है। देश के सबसे बड़े बहीखाते से संबंधित घोटाले यानी 'अकाउंटिंग फ्रॉड'  के बारे में जानें ये जरूरी बातें:

2009 में सत्यम के तत्कालीन चेयरमैन राजू पर कंपनी के खातों में फेरबदल का आरोप लगा। साथ ही, कंपनी के प्रॉफिट्स को कई साल तक बढ़ा चढ़ाकर दिखाने का आरोप भी लगा।

राजू ने सत्यम के अध्यक्ष के पद से यह कहते हुए इस्तीफा दे दिया था कि उन्होंने कंपनी को डूबने से बचाने के लिए खातों में हेराफेरी की।

राजू को आंध्र प्रदेश पुलिस की क्राइम ब्रांच शाखा ने गिरफ्तार किया, इससे पहले ही राजू ने धोखाधड़ी की बात कथित तौर पर स्वीकार कर ली थी। राजू के साथ उनके भाई रामा राजू व कुछ और लोग भी थे। सभी 10 आरोपी खबर लिखे जाने तक जमानत पर रिहा थे।

6 साल पहले शुरू हुई पड़ताल में 3000 डॉक्युमेंट्स और 226 चश्मदीद को खंगाला गया।

पिछले साल जनवरी में राजू की पत्नी नंदिनी राजू और बेटा तेजा राजू व रामा राजू को उनके 21 रिश्तेदारों समेत इनकम टैक्स पेमेंट से जुड़े मामले में आर्थिक मामलों के स्पेशल कोर्ट ने दोषी करार दिया।

पिछले साल, 8 दिसंबर को, रामालिंगा राजू, रामा राजू, वदलामानी श्रीनिवास और पूर्व डायरेक्टर राम म्यानपति को 6 महीने की जेल की सजा हुई। आर्थिक मामलों के स्पेशल कोर्ट इन सब पर कंपनी ऐक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत जुर्माना भी लगाया।

घोटाले के बाद टेक महिंद्रा ने सरकार द्वारा प्रायोजित नीलामी में इसका अधिग्रहण कर लिया था। बाद में महिंद्रा सत्यम का टेक महिंद्रा में में विलय कर दिया गया।


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