खास बातें
- दिल्ली की एक अदालत शनिवार को जी नेटवर्क के दो संपादकों की याचिका पर फैसला सुनाएगी जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस को उनकी आवाज का नमूना लेने से रोकने का आग्रह किया था।
नई दिल्ली: दिल्ली की एक अदालत शनिवार को जी नेटवर्क के दो संपादकों की याचिका पर फैसला सुनाएगी जिसमें उन्होंने दिल्ली पुलिस को उनकी आवाज का नमूना लेने से रोकने का आग्रह किया था। दोनों से कांग्रेस सांसद नवीन जिन्दल की कंपनी के अधिकारियों द्वारा किए गए स्टिंग ऑपरेशन में रिकॉर्ड ऑडियो क्लिप का मजमून पढ़ने को कहा गया था।
स्टिंग कथित तौर पर 100 करोड़ रुपये की उगाही के प्रयास में उनकी भूमिका साबित करने के आशय से किया गया था।
अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट मुकेश कुमार ने फैसला किया कि वह जी न्यूज के सपांदक सुधीर चौधरी और जी बिजनेस के संपादक समीर अहलूवालिया के आग्रह पर शनिवार को अपना निर्णय सुनाएंगे।
संपादकों ने अपने आग्रह में कहा था कि जांच का विषय ऑडियो-वीडियो क्लिप दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा के कब्जे में है और उनसे इसका मजमून पढ़ने को नहीं कहा जा सकता।
उनके आग्रह का विरोध करते हुए विशेष सरकारी वकील राजीव मोहन ने कहा था कि दोनों संपादकों को 21 दिसंबर 2012 को पुलिस ने उनकी आवाज के नमूने रिकॉर्ड करने के लिए 21 दिसंबर 2012 को तलब किया था, लेकिन उन्होंने अपने वकील की सलाह पर आवाज के नमूने देने से इनकार कर दिया।
दोनों पत्रकारों की ओर से पेश विजय अग्रवाल ने कहा था कि दिल्ली पुलिस ने ऑडियो की प्रतिलिपि से ‘फंसाने वाली पंक्तियां’ पढ़ाने के आधार पर उन्हें आवाज के नमूने देने के लिए विवश करने की कोशिश की थी।