खास बातें
- संप्रग सरकार ने कहा कि वह समाज के गरीब और कमजोर तबके पर ईंधन की ऊंची दरों का असर कम करने के प्रयास जारी रखेगी।
नई दिल्ली: सरकार ने स्वीकार किया कि खाद्यान्न और ईंधन की ऊंची कीमतें चिंता का विषय बनी हुई हैं और मुद्रास्फीति पर नियंत्रण पाने के लिए वह विभिन्न कृषि उत्पादों की उत्पादकता में सुधार लाने के उपाय करेगी। संप्रग सरकार ने जनता को अपना रिपोर्टकार्ड जारी करते हुए कहा कि वह समाज के गरीब और कमजोर तबके पर ईंधन की ऊंची दरों का असर कम करने के प्रयास जारी रखेगी। रिपोर्ट कार्ड में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि सरकार ने बढ़ती मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के मकसद से विभिन्न कृषि उत्पादों की उत्पादकता और उत्पादन बढ़ाने के लिए कदम उठाए हैं और भविष्य में और भी कदम उठाए जाएंगे। सिंह ने कहा, वर्ष 2010-11 में खाद्य पदार्थों की मूल्यवृद्धि चिंता का मुख्य कारण रही है। हालांकि, उन्होंने कहा कि समस्या को दूर करने के लिए अनेक उपाय किए गए हैं। उपायों का ब्यौरा देते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ जिंसों के निर्यात पर रोक लगाई गई, कुछ का वायदा कारोबार बंद किया गया। चुनिंदा खाद्यान्नों का आयात शुल्क मुक्त किया गया तथा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों के जरिये दाल और चीनी का आयात किया गया। सार्वजनिक वितरण प्रणाली के जरिये आयातित दालों और खाद्य तेल का वितरण किया गया तथा खुले बाजार में चीनी का अधिक कोटा जारी किया गया।