यह ख़बर 27 दिसंबर, 2012 को प्रकाशित हुई थी

राजकोषीय घाटा कम करने के लिए कठोर निर्णय लेना मजबूरी : चिदंबरम

खास बातें

  • राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की बैठक को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा ‘‘संसाधनों को बढ़ाकर और खर्चों पर नियंत्रण रखकर राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना जरूरी है।’’
नई दिल्ली:

वित्तमंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को कहा कि हाल में सरकार ने जो कठोर निर्णय लिए वह राजकोषीय घाटा कम करने के लिए जरूरी थे।

राष्ट्रीय विकास परिषद (एनडीसी) की बैठक को संबोधित करते हुए चिदंबरम ने कहा ‘‘संसाधनों को बढ़ाकर और खर्चों पर नियंत्रण रखकर राजकोषीय घाटे को नियंत्रित रखना जरूरी है।’’

उन्होंने कहा ‘‘..कुछ उपायों से बेशक तुरंत पीड़ा पहुंचती है लेकिन राजकोषीय घाटे को अगले तीन साल के दौरान तीन प्रतिशत तक नीचे लाने के लिए यह कदम जरूरी हैं। चालू खाते के घाटे को कम करने के लिए भी जरुरी कदम उठाए जा रहे हैं।’’ सरकार ने हाल ही में डीजल के दाम पांच रुपये लीटर बढ़ाए हैं। सस्ते रसोई गैस सिलेंडर की आपूर्ति भी साल में छह तक सीमित कर दी। इससे अधिक सिलेंडर की आपूर्ति बाजार दर पर की जाएगी।

वित्तमंत्री ने सोने का आयात नियंत्रित रखने पर भी जोर दिया। सोने का अधिक आयात होने से चालू खाते का घाटा बढ़ रहा है। वैश्विक आर्थिक संकट के बावजूद उनहोंने विश्वास व्यक्त किया कि घरेलू अर्थव्यवसथा में अच्छी वृद्धि हासिल होगी।

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चिदंबरम ने कहा ‘‘हमारी अर्थव्यवसथा में ऊंची बचत दर, बढ़ता सेवा क्षेत्र और बड़ा मध्यमवर्ग है, इन बुनियादी कारकों के चलते बेहतर आर्थिक वृद्धि हासिल होगी।’’