यह ख़बर 14 अगस्त, 2012 को प्रकाशित हुई थी

‘शीर्ष कार्यकारियों को मिलती है जरूरत से ज्यादा तनख्वाह’

खास बातें

  • भारत में हर चार में से तीन उद्योगपतियों का मानना है कि बड़ी कंपनियों में शीर्ष कार्यकारियों को जितना दिया जाना चाहिए उससे ‘कहीं अधिक’ वेतन दिया जाता है।
नई दिल्ली:

भारत में हर चार में से तीन उद्योगपतियों का मानना है कि बड़ी कंपनियों में शीर्ष कार्यकारियों को जितना दिया जाना चाहिए उससे ‘कहीं अधिक’ वेतन दिया जाता है।

ग्रांट थार्नटन इंटरनेशनल बिजनेस रिपोर्ट के मुताबिक, उद्योगपतियों ने सीईओ का वेतन तय करने के निर्णय में शेयरधारकों की भूमिका बढ़ाने का समर्थन किया है ताकि प्रक्रिया पारदर्शी हो सके।

रिपोर्ट में कहा गया है कि करीब 70 प्रतिशत भारतीय उद्योगपतियों का मानना है कि बड़ी सार्वजनिक कंपनियों में वरिष्ठ कार्यकारियों के लिए पारिश्रमिक नीति में शेयरधारकों की अधिक भागीदारी होनी चाहिए। वैश्विक स्तर पर ऐसे उद्यमियों का अनुपात 67 प्रतिशत है।

रिपोर्ट के मुताबिक, ‘करीब 78 प्रतिशत उद्योगपतियों का मानना है कि वरिष्ठ कार्यकारियों को ‘जरूरत से कहीं अधिक’ तनख्वाह दी जाती है।

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ग्रांट थार्नटन इंडिया के साझीदार विनम्र शास्त्री ने कहा, ‘वरिष्ठ कार्यकारियों को स्पष्ट तौर पर निष्पादन की कसौटी पर खरा उतरना होगा क्योंकि यह ज्यादातर शेयरधारकों के लिए सबसे अधिक मायने रखता है।’