अपना ट्रैफिक बढ़ाने के लिए भारत से ‘क्लिक’ खरीद रही हैं ब्रिटेन की कंपनियां

लंदन:

एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन की कंपनियां आभासी दुनिया यानी इंटरनेट पर अपनी उपस्थिति मजबूत करने के लिए भारत से ‘क्लिक’ खरीद रही हैं। इंटरनेट ट्रैफिक की भाषा में कहें तो ये कंपनियां भारतीय ‘क्लिक फॉर्म’ का इस्तेमाल कर रही हैं ताकि इंटरनेट में उनकी पहुंच अधिक से अधिक नजर आए।
 
‘द टाइम्स’ समाचार पत्र ने एक जांच में पाया है कि पश्चिमी कंपनियों को अपना इंटरनेट ट्रैफिक बढ़ाने के लिए एक डॉलर में 1000 क्लिक लेने या 1000 से लेकर 10,000 फेसबुक ‘लाइक’ हासिल करने या ट्विटर फॉलोअर पाने के पैकेज की पेशकश की जा रही है।
 
समाचार पत्र के संवाददाता ने खुद को एक ब्रितानी गायक का नुमाइंदा बताते हुए यह जांच की जो अपनी ऑनलाइन प्रोफाइल को बढ़ावा देना चाहता है। संवाददाता को दिल्ली व मुंबई के सेवा प्रदाताओं ने विभिन्न पैकेजों की पेशकश की।
 
एक फर्म इंडियन फेसबुक लाइक्स के नवदीप शर्मा ने अखबार को बताया, 'मैं आपको छह से सात दिन में फेसबुक पर 1000 लाइक दे सकता हूं।’ शर्मा के अनुसार, उनकी फर्म ‘सोशल मीडिया ऑप्टीमाइजेशन’ में विशेषज्ञ बताती है।’

शर्मा ने कहा, '2000 या इससे अधिक के लिए इसमें दोगुना समय लगेगा। संख्या बढ़ने पर यह तेजी से बढ़ेगी। यूट्यूब व्यू आसान हैं। मैं आपको 3000 से 4000 व्यू प्रतिदिन दे सकता हूं।’
 
उसने कहा कि उसके ज्यादातर ग्राहक अमेरिका या ब्रिटेन की कंपनियां हैं। जाली इंटरनेट का पता लगाने वाली अमेरिकी कंपनी फोरेंसिक के मुख्य कार्यकारी डेविड सेंड्राफ ने कहा कि जाली ट्रेफिक का बाजार 60 करोड़ डॉलर सालाना है और यह अनुमानित 20 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।
 
सेंड्राफ ने कहा, ‘इस तरह के क्लिक फॉर्म आमतौर पर भारत, वियतनाम व बांग्लादेश जैसे देशों से आ रहे हैं, जहां श्रम सस्ता है। इसकी वास्तविक मार विज्ञापनदाताओं पर पड़ती है।’ उल्लेखनीय है कि पेप्सी, मर्सीडीज बेंज जैसी अनेक दिग्गज कंपनियों पर आरोप हैं कि वे ट्विटर पर जाली फॉलोअर खरीदती हैं।

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