खास बातें
- दूरसंचार कंपनियों और सरकार के बीच जारी गतिरोध के बीच निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों के प्रमुखों ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात की।
नई दिल्ली: दूरसंचार कंपनियों और सरकार के बीच जारी गतिरोध के बीच निजी क्षेत्र की दूरसंचार कंपनियों के प्रमुखों ने बुधवार को प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मुलाकात कर विवाद का जल्द से जल्द हल निकालने की मांग की। 3जी रोमिंग सेवाओं और अतिरिक्त स्पेक्ट्रम के लिए एकमुश्त शुल्क पर विवाद उठा है। भारती एयरटेल के सुनील मित्तल, आरकॉम के अनिल अंबानी और वोडाफोन के वितोरियो कोलाओ सहित अग्रणी दूरसंचार कंपनियों के प्रमुखों ने वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी और दूरसंचार मंत्री कपिल सिब्बल से भी मुलाकात की और उनके समक्ष अपने विचार रखे। दूरसंचार मंत्रालय सूत्रों के मुताबिक थ्रीजी रोमिंग समझौते के विवादास्पद मामले में उद्योग में कोई सर्वसम्मति नहीं है। उल्लेखनीय है कि इस समझौते को दूरसंचार विभाग और इस क्षेत्र के नियामक ट्राई दोनों ने लाईसेंस मानदंडों का उल्लंघन करार दिया है। सूत्रों ने बताया कि थ्रीजी रोमिंग के अलावा कंपनियांे ने स्पेक्ट्रम मूल्यांकन और विलय व अधिग्रहण के संबंध में ट्राई की सिफारिशों पर भी चर्चा की। इस बैठक में क्या हुआ इसका पता नहीं चल सका। परिचालकों ने ट्राई के अध्यक्ष जे एस शर्मा से भी मुलाकात की और उन्हें भी इस बारे में बताया। कल सिब्बल ने कहा था कि थी्रजी रोमिंग जैसे मामलों से जुड़े फैसले उद्योग के साथ चर्चा और कानून के मुताबिक ही किए जाएंगे। यह समझौते का मुद्दा भारती एयरटेल, वोडाफोन एस्सार और आइडिया सेल्यूलर समेत प्रमुख सेवा प्रदाताअ द्वारा देश भर में थ्रीजी रोमिंग नेटवर्क प्रदान के से जुड़ा है। हाल ही में दूरसंचार विभाग ने एक आंतरिक नोट में कहा कि थ्रीजी सेवाओं के लिए दूरसंचार कंपनियों के बीच रोमिंग के समझौते से सरकार को राजस्व का नुकसान हो सकता है।