खास बातें
- ऊंची मुद्रास्फीति के चलते कर संग्रह में कमी आने की संभावना के मद्देनजर सरकार ने संकेत दिया कि वह कर रिफंड के मामले में रफ्तार कम करेगी।
New Delhi: ऊंची मुद्रास्फीति की वजह से 2011-12 में कर संग्रह में कमी आने की संभावना के मद्देनजर सरकार ने संकेत दिया है कि वह कर रिफंड के मामले में रफ्तार कम करेगी और साथ ही पेट्रोलियम उत्पादों पर शुल्कों में कटौती से बचेगी। वरिष्ठ आयकर अधिकारियों की बैठक के दौरान एक शीर्ष राजस्व अधिकारी ने यह संकेत दिया। इस मौके पर मौजूद वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने भी इस आकलन पर सहमति जताई। मुखर्जी ने बीते वित्तवर्ष में 4.46 लाख करोड़ रुपये के कर संग्रहण के लिए आयकर विभाग की सराहना करते हुए चेताया कि जिंसों के ऊंचे दाम तथा वृद्धि दर में कमी से चालू वित्तवर्ष में 5.33 लाख करोड़ रुपये के कर संग्रह के लक्ष्य को पाना कठिन है। राजस्व सचिव सुनील मित्रा ने कहा कि महंगाई से घरेलू मांग प्रभावित होगी, जिससे सकल घरेलू उत्पाद की वृद्धि दर घटेगी और फिर कर संग्रह घटेगा। मित्रा ने पेट्रोलियम उत्पादों पर सीमा या उत्पाद शुल्क में किसी तरह की कटौती का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह की कार्रवाई से अप्रत्यक्ष कर संग्रह घटेगा। मित्रा ने यह भी संकेत दिया कि सरकार संभवत: कर रिफंड पर अपनी रफ्तार घटाएगी।