यह ख़बर 20 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

विदेशों में अर्जित संपत्ति मामले में कर अपवंचना पर सख्ती बरतेगी सरकार

खास बातें

  • विदेशों में खरीदी गई संपत्ति का समुचित रिटर्न न भरने का ममला सामने आने पर आयकर विभाग 16 वर्ष पीछे के आपके रिकार्ड को खंगालने की कार्रवाई कर सकता है।
नई दिल्ली:

विदेशों में खरीदी गई संपत्ति का समुचित रिटर्न न भरने का ममला सामने आने पर आयकर विभाग 16 वर्ष पीछे के आपके रिकार्ड को खंगालने की कार्रवाई कर सकता है।

वित्त मंत्रालय के अधिकारियों के अनुसार आपकी यदि वैध तरीके से रखी गई चल अचल संपत्ति यदि विदेश में है तो इसमें कोई समस्या नहीं है, लेकिन ऐसा धन अथवा अचल संपत्ति विदेशों में रखी है अथवा खरीदी गई है जिसकी जानकारी कर रिटर्न में नहीं दी गई है तो ऐसी विदेशी संपत्ति की जानकारी होने पर पिछले 16 साल तक की रिटर्न की जांच हो सकती है और उसपर कर एवं जुर्माना भरना पड़ सकता है।

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वित्त सचिव आरएस गुजराल ने मंगलवार को भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग मंडल महासंघ (फिक्की) की राष्ट्रीय प्रबंधन समिति की बजट बाद बैठक को संबोधित करते हुये कहा कि पिछली तिथि से कर मामलों को खोलने का जहां तक सवाल है यह कर अपवंचनाओं के मामलों को देखते हुये किया गया है। हालांकि उन्होंने स्पष्ट किया ‘‘ऐसा नहीं है कि सरकार 1962 के बाद के सभी मामलों को देखेगी, कुछ मामले ऐसे हैं जो काफी समय से चल रहे हैं और विभिन्न स्तरों पर है, उनमें इसका लाभ मिलेगा।’’ गुजराल ने स्पष्ट किया कि आयकर कानून में छह साल की सीमा दी गई है। घरेलू मामले में आयकर के छह साल पुराने मामले नहीं खोले जा सकते हैं, लेकिन विदेशों में यदि धनसंपत्ति रखने अथवा खरीदने का कर चोरी का मामला है तो इसके लिये 16 साल पुराने मामलों की जांच पड़ताल हो सकती है। बजट में इसका प्रावधान किया गया है। हालांकि, उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले में समुचित सुरक्षापाय करेगी ताकि किसी को अनावश्यक परेशानी नहीं हो।