यह ख़बर 25 फ़रवरी, 2013 को प्रकाशित हुई थी

सुप्रीम कोर्ट का सहारा को और समय देने से इनकार

खास बातें

  • अपने निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने के लिए कुछ और समय मिलने की सहारा समूह की अंतिम उम्मीद उच्चतम न्यायालय ने खत्म कर दी।
नई दिल्ली:

अपने निवेशकों को 24 हजार करोड़ रुपये लौटाने के लिए कुछ और समय मिलने की सहारा समूह की अंतिम उम्मीद उच्चतम न्यायालय ने खत्म कर दी।

प्रधान न्यायाधीश अलतमस कबीर की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने सहारा समूह को और समय देने से इनकार करते हुए फरवरी के प्रथम सप्ताह तक निवेशकों का धन लौटाने की न्यायिक आदेश का पालन नहीं करने के लिए उसे आड़े हाथों लिया।

इसी खंडपीठ ने सहारा समूह की दो कंपनियों को निवेशकों का धन लौटाने के लिए पूर्व में निर्धारित अवधि बढ़ाई थी।

न्यायाधीशों ने सख्त लहजे में कहा, ‘यदि आपने हमारे आदेशानुसार धन नहीं लौटाया है तो आपको न्यायालय में आने का कोई हक नहीं बनता है।’ उन्होंने कहा कि यह समय सिर्फ इसलिए बढ़ाया गया था ताकि निवेशकों को उनका धन वापस मिल सके।

सहारा समूह के मुखिया सुब्रत राय और इसकी दो कंपनियां सहारा इंडिया रियल इस्टेट कारपोरेशन और सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेन्ट कारपोरेशन पहले से ही एक अन्य खंडपीठ के समक्ष न्यायालय की अवमानना की कार्यवाही का सामना कर रही हैं।

इस खंडपीठ ने निवेशकों का धन लौटाने के आदेश का पालन नहीं करने के कारण छह फरवरी को सेबी को सहारा समूह की दो कंपनियों के खाते जब्त करने और उसकी संपत्तियां कुर्क करने का आदेश दिया था।

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सहारा समूह के मामले की सुनवाई शुरू होते ही उच्चतम न्यायालय बार एसोसिएशन के अध्यक्ष एम कृष्णामूर्ति ने खड़े होकर प्रधान न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली खंडपीठ द्वारा इसकी सुनवाई करने पर आपत्ति की। उनका कहना था कि इस पीठ को मामले की सुनवाई नहीं करनी चाहिए क्योंकि निवेशकों को धन लौटाने का आदेश दूसरी खंडपीठ ने दिया था।