नई दिल्ली:
सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रीय कर न्यायाधिकरण अधिनियम को आज असंवैधानिक घोषित कर दिया। इस कानून के तहत कर मामलों पर फैसला करने के लिए एक पंचाट का गठन किया गया था और इस मामले में उच्च न्यायालयों का अधिकार ले लिया गया था।
यह निर्णय करने वाली मुख्य न्यायाधीश आरएम लोढ़ा की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने कहा कि 2005 में पारित यह अधिनियम असंवैधानिक है, क्योंकि इसके तहत गठित राष्ट्रीय कर न्यायाधिकरण (एनटीटी) उच्चतर न्यायपालिका के क्षेत्राधिकार का अतिक्रमण करता है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ ऊंची अदालतें ही महत्वपूर्ण कानूनों से जुड़े मुद्दों पर विचार कर सकती है न कि कोई पंचाट।
एनटीटी की संवैधानिक वैधता को चुनौती देने वाली कई याचिकाएं कोर्ट के समक्ष थीं, जिन पर सुनवाई के बाद कोर्ट ने यह निर्णय किया। याचिकाओं में दलील दी गई है कि इस अधिनियम से इस बात का गंभीर खतरा है कि इस तरह न्यायपालिका की जगह विभिन्न मंत्रालयों के विभागों की तरह काम करने वाले तमाम अर्धन्यायिक पंचाट खड़े कर दिए जाएंगे।