नई दिल्ली: निवेशकों के रुपये न लौटाने के मामले में सहारा चीफ को फिलहाल जेल में ही रहना होगा। 5,000 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी न चुकाने तक उन्हें कोई राहत नहीं मिलेगी।
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को अपने आदेश से उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। इसके मुताबिक अब उन्हें ब्याज समेत 36,000 करोड़ रुपये चुकाने होंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय की जमानत अर्जी पर अपना फैसला सुनाते हुए कहा कि फिलहाल बैंक गारंटी दिए बिना सहारा चीफ को जमानत नहीं दी जा सकती। इसके बाद अगर वो रिहा हो जाते हैं, तो उन्हें 9 किश्तों में बाकी रकम जमा करानी होगी। पहली किश्त के तौर पर तीन महीने के भीतर तीन हजार करोड़ रुपये देने होंगे, जबकि बाकी रकम आठ किश्तों में चुकाने होंगे।
फैसले में कहा गया है कि अगर सुब्रत रॉय रिहा होते हैं, तो वो बिना अनुमति देश छोड़कर नहीं जा सकते। उन्हें अपना पासपोर्ट जमा कराना होगा, साथ ही उन्हें हर 15 दिन में पुलिस स्टेशन को बताना पड़ेगा कि वो कहां हैं। इसके अलावा अगर उन्होंने दो किश्तें नहीं चुकाईं, तो उनकी बैंक गारंटी को सेबी कैश करा सकता है। अगर तीन किश्तें नहीं चुकाई गईं, तो सहारा चीफ और उनके दोनों निदेशकों को दोबारा हिरासत में लिया जा सकता है।
इस दौरान सहारा की तरफ से पेश वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि बैंक ने अब गारंटी देने से मना कर दिया है। यानी अभी बैंक गारंटी नहीं दी जा सकती। इससे साफ है कि फिलहाल सहारा को जमानत नहीं मिलेगी। हालांकि जेल के गेस्ट हाउस में उनके लिए इंतजाम को आठ हफ्ते और बढ़ा दिया गया है।
सहारा को रुपये का इंतजाम करने और संपति बेचने की इजाजत दे दी गई है। सुप्रीम कोर्ट से सहारा ने पैसों का इंतजाम करने के लिए छह हफ्ते की जमानत मांगी थी। इसके साथ ही एक बैंक का गारंटी फॉर्मेट भी जमा किया गया था। हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे मंजूर कर लिया, लेकिन अब इस आदेश का फायदा नहीं, क्योंकि बैंक ने 5,000 करोड़ की गारंटी देने से इनकार कर दिया है। सुब्रत रॉय पिछले साल 4 मार्च से जेल में बंद हैं।