खास बातें
- सुब्बाराव ने कहा कि दुनिया में मंदी का खतरा फिर खड़ा हो गया है। ऐसे में केन्द्रीय बैंकों पर वैश्विक आर्थिक समस्याओं से निपटने की जिम्मेदारी होगी।
न्यूयार्क: रिजर्व बैंक गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा है कि दुनिया में मंदी के बाद एक मंदी का खतरा फिर खड़ा हो गया है, ऐसे में केन्द्रीय बैंकों पर वैश्विक आर्थिक समस्याओं से निपटने की जिम्मेदारी होगी। न्यूयार्क विश्वविद्यालय के स्टर्न स्कूल ऑफ बिजनेस में एक कार्यक्रम में सुब्बाराव ने कहा मंदी से निपटने की जिम्मेदारी केन्द्रीय बैंकों पर होगी। मौद्रिक प्रोत्साहनों के जरिए इस स्थिति उन्हें निपटना होगा। पिछले कुछ महीनों के दौरान मंदी एक बार फिर दिखने लगी है, विकसित देशों में सरकारें नीतिगत जाम की स्थिति में फंसी हैं। वह अल्पकालिक वित्तीय प्रोत्साहनों और दीर्घकालिक वित्तीय मजबूती के बीच संतुलन बिठाने में पसोपेश की स्थिति में हैं। सुब्बाराव ने कहा कि यह संकट बुद्धीजीवियों के समक्ष कई मामलों में चुनौती के समान है। मेरा अपना अनुभव रहा है कि दुनिया की वास्तविक समस्याएं पढ़ने वाली किताबों के समाधान से कहीं ज्यादा जटिल हैं। रिजर्व बैंक गवर्नर ने इससे पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष की बैठक में कहा, समय हाथ से निकला जा रहा है और इसके साथ ही समस्याओं के निदान भी नहीं सूझ रहे हैं। उन्होंने कहा कि यूरो क्षेत्र में सरकारी ऋण का संकट काफी गहरा रहा है। इसके साथ ही अमेरिका को भी आर्थिक संकट सता रहा है इससे पूरी दुनिया काफी दबाव में है। दोनों अपने आप में काफी बड़ा जोखिम हैं। यदि दोनों ही संकट साथ-साथ बढ़ते हैं तो व्यापार, वित्त और विश्वास के मामले में व्यापक प्रभाव पड़ेगा। रिजर्व बैंक गवर्नर विश्व बैंक और आईएमएफ की बैठकों में भाग लेने के लिए अमेरिका में हैं।