खास बातें
- सरकार ने प्रमुख तेल कंपनी ओएनजीसी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश एक मार्च को करने का फैसला किया।
नई दिल्ली: सरकार ने प्रमुख तेल कंपनी ओएनजीसी में पांच प्रतिशत हिस्सेदारी का विनिवेश एक मार्च को करने का फैसला किया। प्रस्तावित ब्रिकी के लिए न्यूनतम मूल्य 290 रुपये प्रति शेयर रखा जा सकता है जिससे सरकार को लगभग 12,000-13,000 करोड़ रुपये मिलेंगे।
सरकार ने मौजूदा वित्त वर्ष में विनिवेश के जरिए 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा था। ओएनजीसी में यह विनिवेश नीलामी प्रक्रिया से किया जाएगा।
वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले अधिकारसंपन्न मंत्री समूह की बैठक के बाद पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी ने संवाददाताओं को यह जानकारी दी। उन्होंने कहा, 'नीलामी प्रक्रिया से ओएनजीसी में ब्रिकी कुछ ही दिन में होगी।'
सूत्रों का कहना है कि मंत्री समूह ने इसके लिए पांच रुपये अंकित मूल्य के शेयर का न्यूनतम मूल्य 290 रुपये रखने का फैसला किया है।
सूत्रों ने बताया कि एक दिन की नीलामी एक मार्च को सुबह सवा नौ बजे से दोपहर बाद साढ़े तीन बजे तक होगी। उन्होंने कहा कि स्टाक एक्सचेंजों को भेजे गए नोटिसों में न्यूनतम मूल्य का संकेत दिया गया है।
ओएनजीसी में सरकार की 74.14 प्रतिशत हिस्सेदारी है और उसने 42.777 करोड़ शेयर या पांच प्रतिशत इक्विटी बेचने का प्रस्ताव किया है। इस ब्रिकी में वित्तीय संस्थानों के शामिल होने की अपेक्षा है और इससे सरकार को 1,200 करोड़ रुपये मिल सकते हैं।
उल्लेखनीय है कि सरकार ने 2011-12 के आम बजट में सरकार ने पीएसयू विनिवेश से 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य घोषित किया था लेकिन बीते 11 महीने में वह पीएफसी में हिस्सेदारी बेचकर केवल 1,145 करोड़ जुटा पाई है।
शेयरों की ब्रिकी संस्थागत तथा खुदरा निवेशकों को 'कीमत वरीयता' आधार पर की जाएगी।
मंत्री समूह की इसी महीने हुई बैठक में भेल में इक्विटी ब्रिकी को अगले वित्त वर्ष के लिए टालने का फैसला किया गया था।