यह ख़बर 27 अक्टूबर, 2013 को प्रकाशित हुई थी

शेयर बाजार : आरबीआई समीक्षा पर रहेगी निवेशकों की नजर

मुंबई:

शेयर बाजारों में आगामी कारोबारी सप्ताह में निवेशकों की नजर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की ओर से की जाने वाली मौद्रिक नीति की समीक्षा पर टिकी रहेगी। निवेशक अमेरिका के फेडरल रिजर्व की अगले सप्ताह होने वाली बैठक और दूसरी तिमाही के परिणामों की अगली खेप पर भी नजर गड़ाए रहेंगे।

वायदा एवं विकल्प कारोबार की परिपक्वता अवधि के कारण कारोबारी अपने सौदे को अगले महीने के लिए स्थानांतरित करेंगे, जिस कारण बाजार में उथल-पुथल भरा माहौल रह सकता है। अक्टूबर महीने के सौदे के सौदे गुरुवार 31 अक्टूबर को परिपक्व होंगे।

अगले सप्ताह मौजूदा कारोबारी साल की दूसरी तिमाही के परिणाम प्रकाशित करने का दौर जारी रहेगा। सोमवार को मारुति सुजुकी और टीवी 18 ब्रॉडकास्ट, मंगलवार को एनटीपीसी, रैनबेक्सी लैब और टाटा कम्युनिकेशंस, बुधवार को बालाजी टेलीफिल्म्स, भारती एयरटेल, डीएलएफ, आईडीबीआई बैंक, नेशनल फर्टिलाइजर और नेस्ले इंडिया, गुरुवार को सेसा स्टरलाइट तथा शुक्रवार को बर्जर पेंट्स और पुंज लॉयड जैसी कंपनियां दूसरी तिमाही के परिणामों की घोषणा करेंगी।

अगले सप्ताह वाहन और सीमेंट कंपनियों के शेयरों पर भी ध्यान रहेगा, क्योंकि वे अक्टूबर 2013 के लिए बिक्री के आंकड़े एक नवंबर से जारी करेंगी।

आरबीआई मंगलवार (29 अक्टूबर) को मौजूदा कारोबारी साल की मौद्रिक नीति की तिमाही समीक्षा की घोषणा करेगा। बाजार का अनुमान है कि आरबीआई महंगाई पर नियंत्रण लगाने के लिए रेपो और रिवर्स रेपो दर में 25 आधार अंक की वृद्धि कर सकता है। पिछले आंकड़े के मुताबिक, थोक महंगाई दर सितंबर माह में बढ़कर 6.46 फीसदी रही, जो अगस्त में 6.1 फीसदी थी। उधर, उपभोक्ता महंगाई दर भी सितंबर में बढ़कर 9.84 फीसदी रही, जो अगस्त में 9.52 फीसदी थी।

फेडरल ओपेन मार्केट समिति (एफओएमसी) मंगलवार (29 अक्टूबर) और बुधवार (30 अक्टूबर) को दो दिवसीय नीति बैठक करेगी। इससे पहले अमेरिका के फेडरल रिजर्व ने 18 सितंबर को वित्तीय राहत कार्यक्रम को धीरे-धीरे बंद करने के फैसले को कुछ समय के लिए टाल कर निवेशकों और अर्थशास्त्रियों को आश्चर्यजनक खुशी में डाल दिया था।

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राहत कार्यक्रम के तहत फेड हर माह 85 अरब डॉलर मूल्य के बांड की खरीदारी करता है। यह राशि विकासशील देशों में काफी हद तक तरलता पैदा कर रही है। राहत कार्यक्रम को बंद करने की आशंका के कारण बाजार में दो-तीन महीने से अस्थिरता चल रही थी। लेकिन इसे फिलहाल टाल देने का देश के शेयर बाजार पर सकारात्मक असर हुआ है।