यह ख़बर 04 मई, 2013 को प्रकाशित हुई थी

शारदा घोटाला : अन्य कंपनियों की बढ़ी मुसीबत

खास बातें

  • शारदा ग्रुप चिटफंड घोटाले पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के साथ ही पश्चिम बंगाल में पैसे जमा लेने वाली अन्य कंपनियों पर भी इस घोटाले की आंच आने लगी है। निवेशक अपनी जमा राशि तुरंत देने की मांग करने लगे हैं।
कोलकाता:

शारदा ग्रुप चिटफंड घोटाले पर राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तेज होने के साथ ही पश्चिम बंगाल में पैसे जमा लेने वाली अन्य कंपनियों पर भी इस घोटाले की आंच आने लगी है। निवेशक अपनी जमा राशि तुरंत देने की मांग करने लगे हैं।

घोटाले की सीबीआई जांच की मांग करने वाली कांग्रेस ने राज्य में सत्ताधारी तृणमूल पर दोषियों को छिपाने का आरोप लगाया है और इस मुद्दे पर मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से इस्तीफे की मांग की है।

कांग्रेस सांसद दीपा दासमुंशी ने यहां कहा, "क्या यह विश्वास करने वाली बात है कि बनर्जी को घोटाले की भनक नहीं लगी थी? यदि वास्तव में वह अनजान थीं तो उन्हें सत्ता में बने रहने का कोई अधिकार नहीं है।"

कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप भट्टाचार्य ने कहा, "वह (बनर्जी) सीबीआई जांच से बचती फिर रही हैं क्योंकि उन्हें पता है कि इससे तृणमूल का शारदा के साथ अपवित्र संबंध का भेद खुल जाएगा।"

शारदा घोटाले का पर्दाफाश होने के समय से ही बनर्जी यह कहती आई हैं कि उन्हें 15 अप्रैल तक शारदा के चिटफंड कारोबार और वित्तीय अनियमितता के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

पार्टी के खिलाफ विपक्ष के हमलों का जवाब देने के लिए बनर्जी ने स्वयं ही मोर्चा संभाल लिया और पूर्व की वाममोर्चा सरकार पर घोटाले का आरोप यह कहते हुए थोप दिया कि उसी ने पोंजी फर्म को राज्य में पांव पसारने की अनुमति दी। उन्होंने राज्य सरकार को बदनाम करने के लिए कांग्रेस और वामपंथियों के बीच सांठगांठ का आरोप लगाया।

केंद्र की कांग्रेस नीत सरकार भी बनर्जी के निशाने पर आई जिसके बारे में उन्होंने दावा किया कि अगले चुनाव के बाद यह गठजोड़ सत्ता में नहीं आने वाला।

उत्तरी 24 परगना जिले में शुक्रवार को पार्टी की रैली को संबोधित करते हुए बनर्जी ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन को केंद्र में दो बार सत्ता तो मिली, लेकिन तीसरी बार नहीं मिलने जा रही है।

एक अन्य घटनाक्रम में मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शनिवार को गणेश डे को पार्टी से निष्कासित कर दिया। शारदा ग्रुप से रिश्ते रखने को लेकर पुलिस ने डे से पूछताछ की थी।

इस बीच चिट फंड कंपनियों में निवेश करने वालों का राज्यभर में पदर्शन जारी है। निवेशक अपने पैसे वापस मांग रहे हैं।

निवेशकों ने शुक्रवार को एमपीएस ग्रुप के सिटी कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया और अपना जमा धन तुरंत दिए जाने की मांग की।

दुर्गापुर जिले के बर्धवान में शिने इंडिया इन्फ्रा लि. में निवेश करने वालों ने प्रदर्शन किया और अपनी जमा राशि मांगी। स्थिति पर काबू पाने के लिए पुलिस को यहां हस्तक्षेप करना पड़ा।

विरोध प्रदर्शन के बीच निवेश स्वीकार करने वाली कंपनी यूरो ग्रुप के कोलकाता के साल्ट लेक इलाके में स्थित कार्यालय को पुलिस ने बंद करा दिया।

गुरुवार से कम से कम पांच ऐसी फर्मों के कार्यालय बंद कराए जा चुके हैं। पुलिस को धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक सांठगांठ की शिकायत मिलने के बाद यह कार्रवाई की गई है।

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कंपनी मामलों के मंत्रालय के मुताबिक राज्य में चल रहे 73 फर्मों के खिलाफ शिकायतें मिली हैं।