यह ख़बर 13 मार्च, 2011 को प्रकाशित हुई थी

संपत्ति प्रबंधकों पर सख्ती के पक्ष में सेबी

खास बातें

  • पूंजी बाजार नियामक धनसंपत्ति प्रबंधक कंपनियों और विशेषतौर पर इनके संपर्क प्रबंधकों पर नियमन शिकंजा कसने की प्रक्रिया में है।
मुंबई:

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड :सेबी: की यदि चली तो आने वाले दिनों में धनसंपत्ति प्रबंधकों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। पूंजी बाजार नियामक धनसंपत्ति प्रबंधक कंपनियों और विशेषतौर पर इनके संपर्क प्रबंधकों पर नियमन शिकंजा कसने की प्रक्रिया में है। सिटी बैंक की गुड़गांव शाखा में हाल ही में उसके संपर्क अधिकारी द्वारा किए गए 350 करोड़ रुपये के घोटाले को देखते हुए सेबी की यह सोच बनी है। इसमें बैंक के संपर्क अधिकारी ने निवेश योजनाओं में धनी निवेशकों को लुभाने के लिये जाली दस्तावेज का इस्तेमाल किया और बड़ी मछलियों को अपने जाल में फांस लिया। वित्तीय उत्पादों के इस जटिलता भरे क्षेत्र में निवेशकों के हितों की सुरक्षा के लिये सेबी का मानना है कि विभिन्न नियामकों के बीच केवल संचालन स्तर पर ही नहीं बल्कि निगरानी के स्तर पर भी बेहतर तालमेल होना चाहिये और इसके लिये गंभीर प्रयास किये जाने चाहिए। सेबी के निवेश प्रबंधन विभाग के प्रमुख कार्यकारी निदेशक केएन विद्यानाथन ने एक संगोष्ठी में इस मामले में कड़ा रुख अपनाते हुये कहा हम चुपचाप नहीं रह सकते, हमें एक साथ आगे आने की जरुरत है और यह देखना होगा कि इस संपत्ति प्रबंधन क्षेत्र का कैसे बेहतर नियमन हो सकता है। इस क्षेत्र का फैलाव अलग अलग अधिकार क्षेत्रों में है। विद्यानाथन निवेश प्रबंधन विभाग का प्रमुख होने के नाते विदेशी संस्थागत निवेशकों और म्यूचुवल फंड के कामकाज को भी देखते हैं। उन्होंने कहा यह बाजार अब काफी कुछ एडवांस हो चुका है। संपत्ति प्रबंधन का यह क्षेत्र बैंकिंग से लेकर पूंजी बाजार और बीमा नियमाकों के क्षेत्र तक फैल चुका है। हमें अब नियामकों के स्तर पर भी एकजुट होने की आवश्यकता है। केवल नीतिगत स्तर पर ही नहीं बल्कि संचालन और निगरानी के मामले में भी मिलकर काम करने की जरुरत है। वैद्यनाथन ने कहा निवेशकों के लिहाज से संपत्ति प्रबंधन कारोबार में संपर्क प्रबंधक बड़ा जोखिम है, क्योंकि संपर्क प्रबंधन के काम में लगे इस अधिकारी की कमाई निवेशकों के सीधे हित से नहीं जुडी है। इस मामले में जोखिम कवर के लिये नियामकों को आगे आना होगा। कर्वी प्राइवेट वैल्थ मैनेजमेंट के मुख्य कार्यकारी अधिकारी त्रिषिकेश परांदेकर ने कहा नियामकों के स्तर पर उठाये जाने वाले इस तरह के कदमों से निश्चित ही उद्योग को फायदा होगा और आगे उद्योग के नाम पर धब्बा नहीं लगेगा। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि कर्वी में संपर्क अधिकारी और संपत्ति प्रबधंकों के लिये जांच परख की कई चरणों की प्रक्रिया है फिर भी यदि कोई अपराध करने पर उतारु ही हो जाये तो धरती पर कोई उसे नहीं रोक सकता है। देश में घरेलू निजी संपत्ति प्रबंधन क्षेत्र इस समय 2,00,000 करोड रुपये का है और यह 25 प्रतिशत की सालाना दर से बढ़ रहा है।


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