यह ख़बर 07 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

रेटिंग का झटका, वित्त मंत्रालय ने बैंकों से खैरियत पूछी

खास बातें

  • मूडीज द्वारा भारतीय स्टेट बैंक की रेटिंग घटाए जाने के बाद वित्त मंत्रालय ने जानना चाहा है कि क्या बैंकों को किसी तरह के वित्त की जरूरत है।
नई दिल्ली:

वित्त मंत्रालय ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से कहा है कि वे तत्काल अपनी वित्तीय जरूरतों के बारे में उसे बताएं। क्रेडिट रेटिंग एजेंसी मूडीज द्वारा देश के सबसे बड़े भारतीय स्टेट बैंक की रेटिंग घटाए जाने के बाद वित्त मंत्रालय ने जानना चाहा है कि क्या उनको किसी तरह के वित्त की जरूरत है। वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, हमने बैंकों से पूछा है कि क्या उन्हें तत्काल किसी तरह के फंड की जरूरत है। जिससे जल्द से जल्द सुधारात्मक कदम उठाए जा सकें। सरकार का सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों को 6,000 करोड़ रुपये उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है, ताकि वे चालू वित्त वर्ष में अपनी शेयर पूंजी को जोखिम पर चढे ऋणों के कम से कम आठ प्रतिशत तक बनाए रख सकें। पिछले साल पूंजी निवेश का बजट 20,157 करोड़ रुपये था। इससे पहले इसी सप्ताह मूडीज ने भारतीय स्टेट बैंक की वित्तीय मजबूती की साख को एक स्तर घटाकर डी प्लस कर दिया था। एसबीआई के निचले टियर एक पूंजी अनुपात और परिसंपत्ति की गुणवत्ता खराब होने की वजह से उसकी रेटिंग घटाई गई है। साख घटने से एसबीआई के लिए विदेशों से उधारी जुटाना महंगा हो जाएगा। जून तिमाही के अंत में एसबीआई का शेयर पूंजी अनुपात जोखिमपूर्ण परिसम्पत्तियों के 7.60 प्रतिशत के बराबर था।


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