यह ख़बर 25 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित हुई थी

एसएंडपी ने भारत की वित्तीय साख घटाई

खास बातें

  • रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने भारत की वित्तीय साख की आउटलुक नेगेटिव (BBB-) कर दी है। एजेंसी ने वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं होने पर दो साल में रेटिंग और कम करने की चेतावनी भी दी है।
नई दिल्ली:

वैश्विक रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड एंड पूअर्स ने भारत की वित्तीय साख की आउटलुक नेगेटिव (BBB-) कर दी है। एजेंसी ने वित्तीय स्थिति में सुधार नहीं होने पर अगले दो साल में भारत की रेटिंग और कम करने की चेतावनी भी दी है।

एसएंडपी के मुताबिक आने वाले वक्त में भारत में आर्थिक विकास की रफ्तार सुस्त रह सकती है और भारत के लिए सात फीसदी विकास दर पाना मुश्किल होगा। यही नहीं, विकास दर 5.3 फीसदी तक गिर सकती है और इसके साथ ही सरकार के लिए वित्तीय घाटे को काबू करना भी मुश्किल होगा। रेटिंग कम होने से भारतीय कंपनियों के लिए विदेशों से वाणिज्यिक ऋण जुटाना अधिक खर्चीला हो जाएगा और पूंजी बाजार पर भी इसका असर होगा।

एसएंडपी के क्रेडिट विश्लेषक ताकाहीरा आगावा ने एक वक्तव्य में कहा, ‘‘आर्थिक परिदृश्य में बदलाव के पीछे तीन में से एक की संभावना की हमारी सोच ने काम किया है। इसमें यदि बाह्य मोर्चे पर स्थिति लगातार बिगड़ती है, आर्थिक वृद्धि की संभावनाएं समाप्त होतीं हैं अथवा कमजोर राजनीतिक समन्वय में वित्तीय सुधारों के मोर्चे पर स्थिति ढीली बनी रहती है।’’

एसएंडपी की BBB- (बीबीबी नकारात्मक) निवेश के मामले में सबसे निचली रेटिंग है। एसएमसी ग्लोबल सिक्युरिटीज के अनुसंधान रणनीतिक प्रमुख जगन्नाथम थुनुंगुटला ने इस पर टिप्पणी करते हुए कहा, ‘‘भारत की यह नई साख रेटिंग जंक बॉंड रेटिंग के दर्जे से मात्र एक कदम दूर है...हमें लगता है कि भारत की आर्थिक वृद्धि की कहानी अब समाप्ति के नजदीक है।’’

रेटिंग एजेंसी ने आगे कहा है भारत की नकारात्मक रेटिंग परिदृश्य अगले 24 महीने के दौरान और कम हो सकता है। एजेंसी ने कहा है, ‘‘यदि भारत के आर्थिक परिदृश्य में सुधार नहीं होता है, विदेशी मोर्चे पर स्थिति और बिगड़ती है और यदि यहां राजनीतिक परिवेश बिगड़ता है तथा राजकोषीय सुधारों की गति धीमी पड़ती है, तो रेटिंग और कम हो सकती है।’’

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(इनपुट  भाषा से  भी)