रुपया ऐतिहासिक गिरावट पर, लेकिन भारतीय कंपनियों का यह कदम बढ़ा सकता है और मुश्किलें

भारतीय कंपनियों का इस साल मार्च के अंत तक विदेशों में 79 बिलियन डॉलर अनहेज्ड लोन था. अब चूंकि रुपया इस साल 7 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है तो इसके चलते इस लोन को चुकाना महंगा पड़ रहा है, ऐसे में कंपनियां जल्दी डॉलर खरीदकर लोन कम करना चाहती हैं. इसका मतलब है कि उन्हें ज्यादा डॉलर खरीदना होगा, जिससे कि डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपया कमजोर होगा. 

रुपया ऐतिहासिक गिरावट पर, लेकिन भारतीय कंपनियों का यह कदम बढ़ा सकता है और मुश्किलें

80 रुपये प्रति डॉलर के ऊपर पहुंच गई है भारतीय मुद्रा. (प्रतीकात्मक तस्वीर)

नई दिल्ली:

भारतीय रुपया पिछले कुछ हफ्तों से लगभग हर रोज नया निचला स्तर देख रहा है. डॉलर के मुकाबले रुपया 80 प्रति डॉलर के ऊपर चल रहा है. ऐसी आशंका है कि रुपया इससे भी नीचे जाएगा. पहले से ही चोट खा रही करेंसी के लिए अब एक और समस्या खड़ी हो रही है. भारतीय कंपनियां रुपये में गिरावट को देखते हुए विदेशों में डॉलर पर कर्ज को हेज करने की होड़ में लग गई हैं. यह रुपये के लिए और बुरा साबित होगा क्योंकि इससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और भारतीय करेंसी को और नुकसान हो सकता है.

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, भारतीय कंपनियों का इस साल मार्च के अंत तक विदेशों में 79 बिलियन डॉलर अनहेज्ड लोन था. अब चूंकि रुपया इस साल 7 फीसदी से ज्यादा गिर चुका है तो इसके चलते इस लोन को चुकाना महंगा पड़ रहा है, ऐसे में कंपनियां जल्दी डॉलर खरीदकर लोन कम करना चाहती हैं. इसका मतलब है कि उन्हें ज्यादा डॉलर खरीदना होगा, जिससे कि डॉलर की मांग बढ़ेगी और इससे रुपया कमजोर होगा. 

Bloomberg की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Standard Chartered Plc की भारत में फाइनेंशियल मार्केट्स की प्रमुख पारुल मित्तल सिन्हा ने कहा कि "जबसे रुपये ने 79 प्रति डॉलर का आंकड़ा पार किया है, तबसे हम देख रहे हैं कि कॉरपोरेट कंपनियां अपने डॉलर के कर्ज को हेज करने की कोशिश कर रही हैं. ऐसे में वर्तमान के जोखिम वाले माहौल में डॉलर के हेज फंड का अनुपात ज्यादा हो जाएगा, इससे डॉलर की मांग बढ़ेगी और रुपया कमजोर होगा."

रुपया 80 प्रति डॉलर के पार, जानें आप पर क्या होगा सीधा असर

आरबीआई ने पहले रुपये को लेकर आश्वस्तता जताई थी कि उभरते बाजारों की करेंसी के मुकाबले रुपया कम अस्थिर रहेगा, इसके चलते कंपनियां अपने बिना हेज किए गए लोन को लेकर सुस्त हो गई थीं. लेकिन पिछले कुछ महीनों में शेयरों में आउटफ्लो और डॉलर की मजबूती ने रुपये को लगातार नीचे धकेला है.

बता दें कि तेल आयातकों की तरफ से अमेरिकी डॉलर की मांग आने और कच्चे तेल की कीमतों में वृद्धि होने से गुरुवार को रुपया शुरुआती कारोबार में एक पैसा टूटकर 80.06 रुपये प्रति डॉलर के सर्वकालिक निचले स्तर पर आ गया. विदेशी मुद्रा कारोबारियों ने कहा कि कच्चे तेल की कीमतों में मजबूती बनी रहने से स्थानीय मुद्रा पर दबाव पड़ा. ब्रेंट क्रूड 106 डॉलर प्रति बैरल के पार चला गया है. यही वजह है कि घरेलू मुद्रा का स्तर 80 रुपये प्रति डॉलर के आस-पास बना हुआ है.

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