यह ख़बर 15 जून, 2011 को प्रकाशित हुई थी

रिलायंस-बीपी सौदे को गृह मंत्रालय की मंजूरी

खास बातें

  • गृह मंत्रालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा अपनी 23 तेल एवं गैस परिसंपत्तियों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी बीपी को बेचने के सौदे को बिना शर्त मंजूरी दे दी है।
New Delhi:

गृह मंत्रालय ने रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा अपनी 23 तेल एवं गैस परिसंपत्तियों में 30 प्रतिशत हिस्सेदारी बीपी को बेचने के सौदे को बिना शर्त मंजूरी दे दी है। इसमें मुकेश अंबानी की अगुवाई वाली आरआईएल का प्रमुख केजी-डी6 ब्लॉक भी शामिल है। यह सौदा 7.2 अरब डॉलर में होगा। पेट्रोलियम मंत्रालय ने देश में सबसे बड़े प्रत्यक्ष विदेशी निवेश पर गृह मंत्रालय से सुरक्षा संबंधी मंजूरी मांगी थी। पेट्रोलियम मंत्रालय के एक शीर्ष अधिकारी ने कहा कि गृह मंत्रालय ने 1 जून को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) दे दिया है। एनओसी देते हुए गृह मंत्रालय ने यह भी पूछा है कि क्या रिलायंस इस हिस्सेदारी की बिक्री की पेशकश सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी गेल या किसी अन्य सरकारी कंपनी को नहीं कर सकती थी। रिलायंस इंडस्ट्रीज ने बीपी को इसलिए भागीदार बनाया है, क्योंकि वह यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी कंपनी की गहरे समुद्र क्षेत्र में तेल एवं गैस उत्पादन में विशेषज्ञता का लाभ लेना चाहती है। रिलायंस को अपने केजी-डी6 क्षेत्र में कुछ तकनीकी समस्या पेश आ रही है और यहां उत्पादन 6.15 करोड़ घन मीटर प्रतिदिन से घटकर 4.8 करोड़ घन मीटर प्रतिदिन रह गया है। हालांकि उत्पादन स्तर को 6.9 करोड़ घन मीटर प्रतिदिन पर ले जाने की योजना थी। रिलायंस को उम्मीद है कि बीपी भंडारण की इन समस्याओं को हल कर पाएगी और उत्पादन को 8 करोड़ घन मीटर प्रतिदिन के स्तर पर ले जाने में मददगार साबित होगी। अधिकारी ने कहा कि कोई भी भारतीय कंपनी चाहे निजी क्षेत्र की हो या सरकारी, के पास गहरे समुद्र की विशेषज्ञता नहीं है और गैस विपणन कंपनी गेल को जोड़ने से रिलायंस के केजी-डी6 या अन्य किसी ब्लॉक को कोई फायदा नहीं पहुंचता। देश की सबसे बड़ी उत्खनन कंपनी तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम (ओएनजीसी) को कृष्णा गोदावरी बेसिन में केजी-डी6 ब्लॉक के पास अपनी खोजों के लिए एक व्यावहारिक विकास योजना बनाने में दिक्कत पेश आ रही है। ओएनजीसी खुद उस ब्लॉक के लिए भागीदारों की तलाश कर रही है और उसने जिन कंपनियों के नाम छांटें हैं, उनमें बीपी भी एक है।


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