यह ख़बर 27 दिसंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

मंदी बाजार पर भारी, पटरी से उतरी विनिवेश की गाड़ी

खास बातें

  • शेयर बाजारों में लगातार गिरावट से इस साल विनिवेश की गाड़ी पटरी से उतर गई। वैश्विक बाजारों की अनिश्चतता बाजार पर भारी रही।
नई दिल्ली:

शेयर बाजारों में लगातार गिरावट से इस साल विनिवेश की गाड़ी पटरी से उतर गई। वैश्विक बाजारों की अनिश्चतता बाजार पर भारी रही। वर्ष 2011 में सरकार ने सार्वजनिक उपक्रमों में अपने शेयर बेचकर 40,000 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा था लेकिन बाजार की पतली हालात के चलते वह कैलेंडर वर्ष की समाप्ति तक लक्ष्य से कोषों दूर खड़ी थी। विनिवेश लक्ष्य पूरा करने और सरकार के राजकोषीय घाटे की बिगड़ती स्थिति में सुधार लाने के लिए विनिवेश विभाग विभिन्न विकल्प खंगालने में लगा है। जिन कंपनियों के पास अच्छी नकदी है उनसे सरकारी इक्विटी वापस खरीदने के विकल्प पर भी विचार किया गया है। कुछ और विकल्प भी तलाशे जा रहे हैं। वर्ष के दौरान सरकार एकमात्र पॉवर फाइनेंस कापरेरेशन का इश्यू ही उतार सकी जिससे उसे 1,145 करोड़ रुपये प्राप्त हुए। हालांकि वर्ष के दौरान सार्वजनिक क्षेत्र की भेल, ओएनजीसी, सेल, इंडियन ऑयल, ऑयल इंडिया सहित कई कंपनियों में विनिवेश की योजना थी, लेकिन अभी तक इनमें से किसी भी कंपनी में हिस्सेदारी नहीं बेची जा सकी। पूंजी बाजार में भारी गिरावट और उठापटक की वजह से सरकार को सार्वजनिक उपक्रमों के विनिवेश की योजना कई बार टालनी पड़ी। हालांकि यह उतार-चढ़ाव वैश्विक कारकों की वजह से ही ज्यादा था। कुछ कंपनियों के मामले में स्वतंत्र निदेशकों की नियुक्ति में देरी की वजह से पब्लिक इश्यू कार्यक्रम आगे नहीं बढ़ पाया।


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