एनसीआर में घर खरीददारों से मुलाकात करते राहुल गांधी
नई दिल्ली: बिल्डरों की मनमानी के खिलाफ खरीदारों के प्रदर्शन ने अब राजनीतिक रंग भी ले लिया है। शनिवार को कुछ ऐसे ही खरीदारों से कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी मिले और कहा कि नया क़ानून बिल्डरों को मनमानी की छूट देगा। इसके बाद सोमवार को भी खरीदार जंतर-मंतर पर जुटे जहां उनके आंदोलन के समर्थन देने के लिए कई कांग्रेसी नेता भी पहुंचे, हालांकि कांग्रेस के इस कदम को मीडिल क्लास में पैठ बढ़ाने के तौर पर देखा जा रहा है, लेकिन सालों से अपने घरौंदे का इंतज़ार कर रहे क़रीब छह लाख लोगों को इस राजनीति में राहत की आस नज़र आ रही है। राज्यसभा में रियल एस्टेट बिल पर भी हंगामे के आसार बन रहे हैं।
इस नए बिल के विरोध के पीछे कांग्रेस कई वजह बता रही है-
- नए बिल में बिल्डरों को मनमानी की छूट
- 2013 के रियल एस्टेट बिल को कमज़ोर किया गया
- देर से मकान देने पर पेनल्टी क्लॉज को कमज़ोर किया गया
- एक प्रोजेक्ट का पैसा दूसरे में लगाने पर सख़्ती नहीं
कांग्रेस का कहना है कि हमने ग्राहकों की सुरक्षा के लिए कानून बनाए थे, लेकिन नए बिल में उसे बिल्डरों के पक्ष में कर दिया गया है।
1-नया बिल : प्रोजेक्ट में देरी पर ब्लैकलिस्टिंग नहीं
पुराना बिल: देरी पर ब्लैकलिस्टिंग का प्रावधान
2-नया बिल: प्रोजेक्ट का 50% अलग खाते में रखना होगा
पुराना बिल: प्रोजेक्ट का 70% अलग खाते में रखना होगा
3-नया बिल: प्रोजेक्ट पास करने के लिए बैकग्राउंड की जांच नहीं
पुराना बिल: बैकग्राउंड की जांच होगी
4-नया बिल: विवाद पर कंज़्यूमर कोर्ट में सुनवाई
पुराना बिल: विवाद पर रेग्यूलेटर के पास सुनवाई
5-नया बिल: प्रोजेक्ट में गड़बड़ी पर कड़ी सज़ा नहीं
पुराना बिल: गड़बड़ी पर कड़ी सज़ा