यह ख़बर 11 फ़रवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

ट्राई की सिफारिशें पुराने ऑपरेटरों के पक्ष में : आरकॉम

खास बातें

  • अनिल अंबानी समूह की दूरसंचार कंपनी आरकॉम ने आरोप लगाया कि 2जी के मूल्य पर ट्राई की सिफारिशें पुराने ऑपरेटरों के पक्ष में झुकी हुई हैं।
New Delhi:

अनिल अंबानी समूह की दूरसंचार कंपनी रिलायंस कम्युनिकेशंस (आरकॉम) ने आरोप लगाया है कि 2जी के मूल्य पर ट्राई की सिफारिशें पुराने ऑपरेटरों के पक्ष में झुकी हुई हैं और यदि इन सुझावों को मान लिया जाता है, तो सरकार को 6,500 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। आरकॉम की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि ट्राई की सिफारिशें निजी क्षेत्र के पुराने जीएसएम ऑपरेटरों भारती, वोडाफोन, एस्सार समूह की लूप टेलीकॉम आदि के पक्ष में हैं। बयान में कहा गया है कि यदि सरकार नौ माह पुरानी यानी मई, 2010 की ट्राई की सिफारिशों के बजाय इन सुझावों को मानती है, तो उसे 6,500 करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान होगा। भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (ट्राई) ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि 6.2 मेगाहर्ट्ज के अखिल भारतीय स्पेक्ट्रम की कीमत बढ़ाकर 10,972.45 करोड़ रुपये की जाए। यह वर्तमान मूल्य 1,658 करोड़ रुपये का छह गुना है। ट्राई ने कहा है कि 6.2 मेगाहर्ट्ज से अतिरिक्त के स्पेक्ट्रम के लिए प्रति मेगाहर्ट्ज 4,571.87 करोड़ रुपये की राशि वसूली जाए। भारती, वोडाफोन, आइडिया और सार्वजनिक क्षेत्र की बीएसएनएल और एमटीएनएल जैसी सभी कंपनियों के पास 6.2 मेगाहर्ट्ज से अधिक का स्पेक्ट्रम है। आरकॉम ने कहा कि ट्राई ने आश्चर्यजनक रूप से 6.2 मेगाहर्ट्ज की अनुबंधित सीमा से अधिक के स्पेक्ट्रम के लिए अतिरिक्त शुल्क सिर्फ शेष बची लाइसेंस की अवधि के लिए वसूलने की सिफारिश की है। ज्यादातर कंपनियों के लिए लाइसेंस की अवधि पांच साल से भी कम की बची है। मई, 2010 में ट्राई ने अपनी सिफारिशों में इसके लिए न्यूनतम अवधि सात साल रखने की सिफारिश की थी। हालांकि, पुरानी ऑपरेटर कंपनियों ने भी इन सिफारिशों को खामियों, अतार्किक और भेदभावपूर्ण बताया है।


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