ASSOCHAM ने RBI से रेपो रेट में 0.35 प्रतिशत से अधिक वृद्धि नहीं करने की दी सलाह

RBI ने 30 सितंबर को मौद्रिक नीति समीक्षा में मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिये रेपो दर (Repo Rate) में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि की थी. मुद्रास्फीति इस साल जनवरी से ही छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है.

ASSOCHAM ने RBI से रेपो रेट में 0.35 प्रतिशत से अधिक वृद्धि नहीं करने की दी सलाह

इस साल मई से अबतक आरबीआई (RBI) रेपो दर में 1.90 प्रतिशत की वृद्धि कर चुका है.

नई दिल्ली:

भारतीय वाणिज्य एंव उद्योग मंडल यानी एसोचैम (ASSOCHAM) ने शुक्रवार को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) से अगले सप्ताह पेश होने वाली मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दर रेपो में बढ़ोतरी को कम रखने को कहा है. उद्योग मंडल का कहना है कि ब्याज दरों में अधिक वृद्धि होने पर इसका आर्थिक सुधार पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है. इस साल मई से अबतक आरबीआई (RBI) रेपो दर में 1.90 प्रतिशत की वृद्धि कर चुका है. केंद्रीय बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास (Shaktikanta Das)की अध्यक्षता वाली छह सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक सोमवार से शुरू होने जा रही है. मौद्रिक नीति की घोषणा सात दिसंबर (बुधवार) को की जाएगी.

एसोचैम ने आरबीआई को लिखे पत्र में कहा है कि रेपो दर में 0.25 से 0.35 प्रतिशत से ज्यादा की वृद्धि नहीं होनी चाहिए. इसके साथ ही उद्योग मंडल ने पत्र में अन्य मुद्दों का भी जिक्र किया गया है और कई तरह के सुझाव भी दिये हैं. इसमें इलेक्ट्रिक वाहन खरीदने के लिये खुदरा कर्ज को रियायती ब्याज दर के साथ प्राथमिक क्षेत्र के अंतर्गत लाने का सुझाव शामिल है.

आरबीआई ने 30 सितंबर को मौद्रिक नीति समीक्षा में मुद्रास्फीति को काबू में लाने के लिये रेपो दर (Repo Rate) में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि की थी. मुद्रास्फीति इस साल जनवरी से ही छह प्रतिशत से ऊपर बनी हुई है. यह केंद्रीय बैंक के टॉलरेंस रेंज से अधिक है. यह लगातार तीसरी बार है जब आरबीआई ने रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की वृद्धि की. सितंबर से पहले जून और अगस्त में भी रेपो दर में 0.50 प्रतिशत और मई में 0.40 प्रतिशत की वृद्धि की गई थी.

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