यह ख़बर 14 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

रिजर्व बैंक के कदम को लेकर विश्लेषक विभाजित

खास बातें

  • रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए मार्च, 2010 के बाद से लेकर अब तक 11 बार नीतिगत दरों में वृद्धि कर चुका है।
Mumbai:

मुद्रास्फीति तथा औद्योगिक वृद्धि दर के अलग-अलग आंकड़ों के बीच रिजर्व बैंक की मध्य तिमाही की मौद्रिक नीति समीक्षा के रूख को लेकर विश्लेषक और अर्थशास्त्री विभाजित हैं। रिजर्व बैंक शुक्रवार को मौद्रिक नीति की समीक्षा करेगा। रेटिंग एजेंसी के फिच के एसोसिएट निदेशक डीके पंत ने कहा, विभिन्न आंकड़ें रिजर्व बैंक अलग-अलग कदम उठाने का इशारा करते हैं। रिजर्व बैंक मुद्रास्फीति पर अंकुश लगाने के लिए मार्च, 2010 के बाद से लेकर अब तक 11 बार नीतिगत दरों में वृद्धि कर चुका है। सकल मुद्रास्फीति जुलाई महीने में 9.22 प्रतिशत रही, जो सामान्य स्तर से कहीं अधिक है। वहीं, दूसरी तरफ जुलाई महीने में औद्योगिक वृद्धि दर 3.3 प्रतिशत रही, जो दो साल का निम्न स्तर है। औद्योगिक वृद्धि दर के आंकड़े सोमवार को जारी किए गए। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने कहा कि औद्योगिक वृद्धि दर कम रहने के बावजूद उन्हें लगता है कि रिजर्व बैंक शुक्रवार को नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि करेगा। उन्होंने कहा, नीतिगत दरों में वृद्धि का चक्र अब समाप्त होने वाला है, लेकिन मुझे लगता है कि इसमें 0.25 प्रतिशत की एक और वृद्धि की जाएगी...यह संभवत: आखिरी वृद्धि होगी। बहरहाल, गोल्डमैन साक्श ने कहा कि इस बार केंद्रीय बैंक नीतिगत दरों में वृद्धि पर विराम लगा सकता है। एक सवाल के जवाब में पंत ने कहा कि सब कुछ अगस्त के मुद्रास्फीति के आंकड़ों पर निर्भर है।


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