यह ख़बर 11 सितंबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

मुद्रास्फीति में तेजी से रिजर्व बैंक बढ़ा सकता है दरें

खास बातें

  • मुद्रास्फीति के 10 प्रतिशत के आसपास बने होने के मद्देनजर रिजर्व बैंक इस सप्ताह मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि कर सकता है।
New Delhi:

सकल मुद्रास्फीति के 10 प्रतिशत के आसपास बने होने के मद्देनजर रिजर्व बैंक इस सप्ताह मौद्रिक नीति समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों में वृद्धि कर सकता है। अगस्त महीने की मुद्रास्फीति 14 सितंबर को जारी होगी, जबकि रिजर्व बैंक 16 सितंबर को मध्य तिमाही की मौद्रिक नीति की समीक्षा करने वाला है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगस्त महीने में सकल मुद्रास्फीति दोहरे अंक में बने रहने की आशंका है। इसको देखते हुए रिजर्व बैंक कड़ी मौद्रिक नीति का रुख अपना सकता है। क्रिसिल के मुख्य अर्थशास्त्री डीके जोशी ने कहा, अगस्त महीने में मुद्रास्फीति 9.5 प्रतिशत से 10 प्रतिशत के बीच रहने की संभावना है। ऐसे में रिजर्व बैंक मध्य तिमाही की समीक्षा में प्रमुख नीतिगत दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि कर सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि दबाव केवल खाद्य वस्तुओं पर नहीं है, बल्कि गैर-खाद्य प्राथमिक वस्तुओं तथा विनिर्मित उत्पादों पर भी है। थोक मूल्य सूचकांक पर आधारित मुद्रास्फीति जुलाई महीने में 9.22 प्रतिशत रही। पिछले वर्ष दिसंबर से यह 9 प्रतिशत के ऊपर बनी हुई है। मुद्रास्फीति पर शिकंजा कसने के लिए रिजर्व बैंक मार्च, 2010 के बाद से प्रमुख नीतिगत दरों में 11 बार वृद्धि कर चुका है। उद्योग जगत का कहना है कि दरों में बार-बार वृद्धि से कर्ज की लागत बढ़ी है, जिससे निवेश प्रभावित हुआ है। आर्थिक वृद्धि दर अप्रैल-जून तिमाही में 7.7 प्रतिशत रही, जो पिछली छह छमाही में सबसे कम है।


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