यह ख़बर 25 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

बचत खाते पर ब्याज नियंत्रण मुक्त, ऋण और महंगा

खास बातें

  • सुब्बाराव ने लोगों के बचत बैंक खातों पर ब्याज का निर्धारण का निर्णय अब बैंकों पर छोड़ने की घोषणा की।
नई दिल्ली:

रिजर्व बैंक ने ऊंची महंगाई दर के मद्देनजर सख्त मौद्रिक नीति जारी रखते हुए मंगलवार को अपनी अल्पकालिक नीतिगत ब्याज दरें चौथाई प्रतिशत और बढ़ा दीं जिससे बैंकों से कर्ज लेना और महंगा हो सकता है। एक अन्य महत्वपूर्ण निर्णय में गवर्नर डी सुब्बाराव ने लोगों के बचत बैंक खातों पर ब्याज का निर्धारण का निर्णय अब बैंकों पर छोड़ने की घोषणा की। रिजर्व बैंक ने मार्च, 2010 से नीतिगत ब्याज दरों में लगातार यह 13वीं बार बढ़ोतरी की है। साथ ही आरबीआई ने चालू वित्त वर्ष के लिए जीडीपी वृद्धि दर का अनुमान घटाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया। बचत बैंक जमाओं की दरों को तत्काल प्रभाव से नियंत्रण मुक्त कर दिया गया है। नीति के मसौदे में कहा गया है, मुद्रास्फीति अब भी बर्दाश्त करने के स्तर से उपर है जिससे कम एवं स्थायी मुद्रास्फीति के प्रति रिजर्व बैंक की प्रतिबद्धता को लेकर विश्वास को जोखिम पैदा हो गया है। रिजर्व बैंक ने यह भी माना है कि आर्थिक वृद्धि की रफ्तार धीमी पड़ गई है। हालांकि, इस साल दिसंबर तक इसमें नरमी आने की संभावना है और उम्मीद है कि मार्च, 2012 तक यह 7 प्रतिशत के स्तर पर आ जाएगी। नीतिगत दरों में आज की गई वृद्धि के साथ रिजर्व बैंक द्वारा अब तक 525 आधार अंक की वृद्धि की जा चुकी है। ब्याज दरों में बार बार बढ़ोतरी किए जाने से तंग आ चुके लोग हालांकि आने वाले समय में थोड़ी राहत महसूस कर सकेंगे क्योंकि रिजर्व बैंक ने संकेत दिया है कि दिसंबर में नीतिगत दरों में बढ़ोतरी किए जाने की संभावना अपेक्षाकृत कम है।


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