यह ख़बर 24 जनवरी, 2011 को प्रकाशित हुई थी

नकदी की तंगी दूर करने को खर्च करे सरकार : रिजर्व बैंक

खास बातें

  • रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंकिंग तंत्र में नकदी की तंगी दूर करने के लिए सरकार को वर्ष की इस अंतिम तिमाही में हाथ खोलकर खर्च करना चाहिए।
मुंबई:

रिजर्व बैंक ने कहा है कि बैंकिंग तंत्र में नकदी की तंगी दूर करने के लिए सरकार को वर्ष की इस अंतिम तिमाही में हाथ खोलकर खर्च करना चाहिए। रिजर्व बैंक की जारी वृहत आर्थिक परिवेश की समीक्षा रिपोर्ट में कहा गया है, यह उम्मीद की जाती है कि सरकार अपनी वार्षिक व्यय प्रतिबद्धता पूरी करने के लिए वर्ष की इस अंतिम तिमाही में खर्च बढ़ाएगी। उल्लेखनीय है कि कैलेंडर वर्ष 2010 की समाप्ति के समय नकदी की स्थिति काफी तंग हो गई थी। स्थिति यह हो गई थी कि दिसंबर 2010 को सरकारी खजाने में अधिशेष की स्थिति बढ़कर 1,44,437 करोड़ रुपये तक पहुंच गई थी जबकि एक महीना पहले नवंबर 2010 में यह 93,425 करोड़ रुपये थी। रिजर्व बैंक को स्थिति का सामना करने के लिए नए प्रावधान करने पड़े और बैंकों को वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) में कुछ रियायतें देनी पड़ीं। केन्द्रीय बैंक ने कहा है कि वर्ष की इस अंतिम तिमाही में जैसे ही सरकार अपनी बजट प्रतिबद्धता को पूरा करने के लिए खर्च करना शुरू करेगी नकदी की तंगी दूर होने लगेगी। नकदी की तंगी बढ़ने से बैंकों में ज्यादा से ज्यादा जमा पूंजी जुटाने के लिए प्रतिस्पर्धा शुरू हो गई और उन्होंने ऊंची ब्याज दर पर नई जमा योजनाएं जारी करनी शुरू कर दी।


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