यह ख़बर 29 जून, 2012 को प्रकाशित हुई थी

रंगराजन ने कहा, रियायतों में कटौती जल्द

खास बातें

  • प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने शुक्रवार को कहा कि सरकार बढ़ते वित्तीय घाटे को कम करने के लिए जल्द ही ईंधन और रासायनिक खादों पर रियायत घटा सकती है।
कोलकाता:

प्रधानमंत्री के आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष सी. रंगराजन ने शुक्रवार को कहा कि सरकार बढ़ते वित्तीय घाटे को कम करने के लिए जल्द ही ईंधन और रासायनिक खादों पर रियायत घटा सकती है।

भारतीय सांख्यिकी संस्थान के संस्थापक पीसी महालानोबिस के जन्म दिवस पर आयोजित एक कार्यक्रम में रंगराजन ने कहा, "रियायत बढ़ रही है। खाद्य रियायत जैसी कुछ रियायतों में कटौती नहीं की जा सकती है, लेकिन ईंधन और रासायनिक खादों में कुछ सम्भावना है।"

रंगराजन ने कहा, "हमें यह तय करना होगा कि वित्तीय घाटा बजट लक्ष्य से अधिक नहीं होना चाहिए।" माना जा रहा है कि मंत्रिमंडल के अगले फेरबदल में रंजराजन वित्त मंत्री बनाए जा सकते हैं, जिसके सितम्बर में होने का अनुमान है।

सरकार मौजूदा कारोबारी साल में वित्तीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद के 5.1 फीसदी तक सीमित रखना चाहती है, जो 2011-12 में 5.76 फीसदी था।

रंगराजन ने कहा कि रसोई गैस, डीजल और रासायनिक खाद में रियायत घटाने की गुंजाइश है। उन्होंने साथ ही कहा, "लेकिन बेहतर अर्थशास्त्र के लिए हमें आम सहमति बनानी चाहिए।" उन्होंने कहा कि काफी अधिक वित्तीय घाटे के कारण सरकार के लिए उद्योग जगत को राहत दे पाना कठिन होगा। लेकिन कुछ खास कारोबारी क्षेत्रों में 'कुछ खास राहत' दिए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि 2008-09 में जिस तरह की राहत दी गई थी, उस तरह की राहत देना कठिन हो सकता है, क्योंकि अभी वित्तीय घाटा काफी अधिक है। उन्होंने हालांकि कहा, "वित्तीय घाटा कम करने की संरचना के तहत कुछ खास राहत योजना दिया जाना सम्भव है।"

भारतीय रिजर्व बैंक ने वित्तीय घाटे की स्थिति पर असंतोष प्रकट करते हुए गुरुवार को कहा कि सरकार के पास राहत योजना के लिए गुंजाइश नहीं है।

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वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट की भूमिका में रिजर्व बैंक के गवर्नर डी. सुब्बाराव ने कहा, "घरेलू मोर्चे पर सुस्त विकास दर, उच्च महंगाई दर और वित्तीय और चालू खाता घाटा गम्भीर चिंता का विषय है। उच्च वित्तीय घाटे के कारण सरकार के पास राहत योजना पेश करने की गुंजाइश कम है।"