यह ख़बर 23 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

राजा ने अपात्र कंपनियों के आगे टाटा समूह को नजरंदाज किया

खास बातें

  • अदालत ने कहा कि राजा ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश की और टाटा समूह की कंपनी टाटा टेलिसर्विसेज और टीटीएमएल को इसकी अनुमति देने में जानबूझकर कर देरी की।
नई दिल्ली:

2जी मामले की सुनवाई कर रही दिल्ली की विशेष अदालत ने शनिवार को कहा कि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा ने अनिल धीरुभाई अंबानी समूह की रिलायंस टेलिकॉम को दोहरी प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का लाभ जानबूझकर दिया और टाटा समूह को इसकी सैद्धांतिक अनुमति देने में देरी की। अदालत के विशेष न्यायाधीश ओपी सैनी ने कहा कि राजा ने दूरसंचार विभाग के अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश की और टाटा समूह की कंपनी टाटा टेलिसर्विसेज और टीटीएमएल को इसकी अनुमति देने में जानबूझकर कर देरी की। अदालत ने टिप्पणी की कि तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ने टाटा समूह की कंपनियों को दोहरी प्रौद्योगिकी (जीएसएम और सीडीएमए) के इस्तेमाल की छूट देने के मामले को कानून मंत्रालय को भेजकर ऐसी स्थिति पैदा की जिससे स्वॉन टेलिकॉम और यूनीटेक वायरलैस जैसी अपात्र कंपनियों को भी लाइसेंस के लिये प्राथमिकता सूची में शामिल करने का अवसर मिल गया। अदालत ने कहा कि राजा ने टाटा समूह की कंपनियों को 10 जनवरी 2008 तक जानबूझकर दोहरी प्रौद्योगिकी की अनुमति नही दी जबकि उसी दिन अपात्र फर्मों को नए लाइसेंस के लिए आशयपत्र जारी कर दिए गए।


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