यह ख़बर 09 अप्रैल, 2012 को प्रकाशित हुई थी

सरकारी बैंकों की घाटे वाली शाखाएं होंगी बंद

खास बातें

  • सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की घाटे में चल रही शाखाओं को बंद करने या किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश दे सकती है।
नई दिल्ली:

सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की घाटे में चल रही शाखाओं को बंद करने या किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने का निर्देश दे सकती है। बैंक शाखाओं को तर्कसंगत बनाने की प्रक्रिया के तहत यह निर्देश दिया जा सकता है।

वित्तीय सेवा सचिव डीके मित्तल ने इस बारे में एक सवाल पर कहा, ‘यह इस समय चल रही बातचीत की प्रक्रिया का हिस्सा है। यह बात सिर्फ बैंकों के लिए ही नहीं, बीमा कंपनियों के लिए भी है। यदि कोई शाखा घाटे में चल रही है, तो हमें नए सिरे से देखना होगा कि ऐसा क्यों है। यदि इसके लिए किसी तरह की कारोबारी रणनीति मसलन शाखा को दूसरे स्थान पर ले जाना या फिर कर्मचारियों की संख्या में कटौती की जरूरत है, तो उस पर विचार होगा।’ उनसे पूछा गया था कि क्या सरकार ने बैंकों को घाटे वाली शाखाओं की रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है।

सीआईआई के एक कार्यक्रम के मौके पर उन्होंने कहा, ‘अंतत: शाखाओं की स्थापना कमाने के मकसद से की जाती है। यदि वे घाटे में चल रही हैं तो उस मामले पर नए सिरे से विचार करना होगा।’

देशभर में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की शाखाओं की संख्या 87,000 है।

ब्याज दरों में बढ़ोतरी और अर्थव्यवस्था की रफ्तार में कमी से कर्ज लेने वालों की ऋण चुकाने की क्षमता कम हुई है। खासकर लघु एवं मझोली इकाइयों की। इससे बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) बढ़ रही हैं।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

दिसंबर, 2011 तक बैंकों की गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) 1.27 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई थीं। इसमें से सरकारी बैंकों की सकल एनपीए 51 प्रतिशत की बढ़ोतरी के साथ दिसंबर 2011 में 1.03 लाख करोड़ रुपये हो गई है। दिसंबर, 2010 के अंत तक सरकारी बैंकों का एनपीए 68,597.09 करोड़ रुपये था।