यह ख़बर 25 अक्टूबर, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'ब्याज दरें बढ़ने से आर्थिक वृद्धि प्रभावित होगी'

खास बातें

  • मुखर्जी ने कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा कीमत वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि से आर्थिक वृद्धि पर कुछ असर जरूर पड़ेगा।
नई दिल्ली:

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने मंगलवार को कहा कि रिजर्व बैंक द्वारा कीमत वृद्धि पर अंकुश लगाने के लिए नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि से आर्थिक वृद्धि पर कुछ असर जरूर पड़ेगा। मुखर्जी ने कहा, मैं उम्मीद करता हूं कि रेपो और रिवर्स रेपो दर में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि का मुद्रास्फीति पर कुछ असर पड़ेगा। साथ ही इसका आर्थिक वृद्धि पर भी कुछ प्रभाव जरूर पड़ेगा। रिजर्व बैंक ने आज अपनी मौद्रिक नीति की छमाही समीक्षा में नीतिगत ब्याज दरों में 0.25 प्रतिशत की वृद्धि की इससे रेपो (जिस ब्याज दर पर बैंकों को रिजर्व बैंक से एक दो दिन के लिए उधार मिलता है) बढ़कर 8.5 प्रतिशत तथा रिवर्स रेपो दर (जिस दर पर केंद्रीय बैंक फौरी तौर पर नकदी लेता है) 7.5 प्रतिशत हो गई है। केंद्रीय बैंक ने आर्थिक वृद्धि के अनुमान को भी 8 प्रतिशत से घटाकर 7.6 प्रतिशत कर दिया है। बाद में बयान जारी कर मुखर्जी ने कहा कि रिजर्व बैंक की नीति से जल्दी ही मुद्रास्फीति सामान्य स्तर पर लाने में मदद मिलेगी साथ ही इसमें चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में आर्थिक वृद्धि को गति मिलने की भी गुंजाइश छोड़ी गई है। उन्होंने कहा कि रिजर्व बैंक का निर्णय मुद्रास्फीति से निपटने को लेकर उसकी प्रतिबद्धता को स्पष्ट करता है। सकल मुद्रास्फीति दिसंबर 2010 से लेकर अबतक 9 प्रतिशत के स्तर से ऊपर है। इस वृद्धि के साथ रिजर्व बैंक उच्च मुद्रास्फीति पर काबू पाने के लिए मार्च 2010 से लेकर अबतक नीतिगत ब्याज दरों में 13 बार वृद्धि कर चुका है। मुखर्जी ने कहा कि दरों में वृद्धि का कर्ज की लागत और निवेश वृद्धि पर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा, हम आने वाले महीनों में निवेश धारणा को मजबूत बनाने के लिए सभी विकल्पों पर गौर कर रहे हैं।


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