खास बातें
- वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा कि 2008 की मंदी से विकसित देशों ने बेहतर तरीके से मुकाबला किया, लेकिन संकट के बादल फिर से गहराने लगे हैं।
वाशिंगटन: वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने कहा है कि 2008 की आर्थिक मंदी से विकसित देशों ने बेहतर तरीके से मुकाबला किया, लेकिन संकट के बादल फिर से गहराने लगे हैं, जो चिंताजनक है। मुखर्जी ने शनिवार को कहा कि यूरो क्षेत्र में वित्तीय संकट, अमेरिका की रेटिंग घटाए जाने, उच्च आय वाले देशों में वित्तीय स्थिरता को लेकर चिंता, असंतुलित तथा धीमी वैश्विक आर्थिक वृद्धि दर, विकासशील देशों में निम्न पूंजी प्रवाह, कई उभरती अर्थव्यवस्थाओं में मुद्रास्फीति खासकर खाद्य वस्तुओं की ऊंची कीमतों तथा बार-बार प्राकृतिक आपदाओं का आना जैसे तमाम मुद्दों के कारण संकट गहराता जा रहा है, जिसका सभी देशों में गरीबों पर खतरनाक प्रभाव पड़ेगा। मौजूदा वैश्विक आर्थिक स्थिति, वृद्धि तथा रोजगार पर विश्व बैंक विकास समिति की बैठक में उन्होंने कहा कि विकासशील देश किसी भी प्रत्याशित एवं अप्रत्याशित चुनौती से निपटने में मदद तथा दीर्घकालिक विकास के लिए वित्त की जरूरत हेतु विश्व बैंक को एक महत्वपूर्ण सहयोगी के रूप में देखते हैं। वित्तमंत्री ने कहा, लेकिन हम उस स्थिति का सामना कर रहे हैं, जहां आईबीआरडी तथा आईएफसी सामान्य मांग भी पूरा करने में असमर्थ है और संसाधान बाधा के कारण चयनित रुख अपनाने को लेकर मजबूर है। ये संस्थान अन्य संकट या प्राकृतिक आपदा के कारण मांग में तेजी के अनुरूप ऋण बढ़ाने में सफल नहीं हैं। इस समस्या को तत्काल हल किए जाने की जरूरत है। हाल की विश्व विकास रिपोर्ट (डब्ल्यूडीआर) पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रणब मुखर्जी ने कहा कि इस बात पर ध्यान देना उपयुक्त होगा कि किस प्रकार विकासशील एवं विकसित देशों में संरक्षणवाद के कारण रोजगार प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में उन नीतियों तथा संस्थागत व्यवस्था को शामिल किया जाना चाहिए जिससे अच्छे रोजगार में महिलाओं की भागदारी को प्रोत्साहन मिलता है। वित्तमंत्री ने कहा, एक विकासशील देश के नजरिये से रोजगार में बड़ा बदलाव हो रहा है और वह कृषि से विनिर्माण क्षेत्र की तरफ स्थानातंरित हो रहा है। मांग की तरफ से विश्व विकास रिपोर्ट में रोजगार सृजन के लिहाज से निजी क्षेत्र, एमएसएमई, स्व-रोजगार के अवसर तथा कृषि उद्योग क्षेत्र की समीक्षा की जानी चाहिए। उन्होंने कहा, आपूर्ति पक्ष की तरफ से रिपोर्ट में बड़े पैमाने पर कौशल विकास की जरूरत तथा रणनीति पर गौर किया जाना चाहिए...। वित्तमंत्री ने कहा कि भारत का जनांकिकी लाभ एक अवसर है। 2025 तक 70 प्रतिशत से अधिक लोग कार्यशील उम्र के होंगे। उन्होंने कहा, इस संदर्भ में हमारी राष्ट्रीय रणनीति सभी तक माध्यमिक शिक्षा पहुंचाने और दक्षता प्रशिक्षण उपलब्ध कराने की है। कौशल विकास की राष्ट्रीय नीति के तहत 2020 तक 50 करोड़ लोगों को दक्ष बनाने का लक्ष्य रखा गया है। यह बड़ा कार्य है। मुखर्जी ने कहा कि भारत इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए हरसंभव प्रयास करने को लेकर प्रतिबद्ध है।