यह ख़बर 08 जुलाई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

बैंकों का एनपीए बढ़ा, प्रणब ने जताई चिंता

खास बातें

  • वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कर्जे में फंसी राशि (एनपीए) बढ़ने पर चिंता व्यक्त की और बैंकों से सुधारात्मक कदम उठाने को कहा।
New Delhi:

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कर्जे में फंसी राशि (एनपीए) बढ़ने पर चिंता व्यक्त की और बैंकों से सुधारात्मक कदम उठाने को कहा। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसयू) के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशकों और मुख्य कार्याधिकारियों के साथ करीब दो घंटे के विचार-विमर्श के दौरान उन्होंने उनके कामकाज और विभिन्न क्षेत्रों में प्रदर्शन की समीक्षा की। बैठक के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में वित्तमंत्री ने बताया कि पिछले वित्त वर्ष 2010-11 में पीएसयू बैंकों की कर्ज में फंसी सकल गैर-निष्पादित राशि (जीएनपीए) एक साल पहले की तुलना में करीब 25 प्रतिशत बढ़कर 74,617 करोड़ रुपये तक पहुंच गई। इससे पिछले वर्ष यह 59,927 करोड़ रुपये रही थी। अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों के सकल एनपीए में करीब 60 प्रतिशत हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का है। हाल के अध्ययन के अनुसार सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया, इंडियन ओवरसीज बैंक, बैंक ऑफ इंडिया और आईडीबीआई बैंक का एनपीए में ज्यादा योगदान रहा है। मुखर्जी ने कहा कि पीएसयू बैंकों में सरकार की शेयरधारिता औसतन 58 प्रतिशत रह गई है। उन्होंने बताया कि सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों (एमएसएमई) के मामले में पीएसयू बैंकों से दिए गए कर्ज में 35 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि हुई है, जबकि इस क्षेत्र के लिए कर्ज वृद्धि का लक्ष्य 20 प्रतिशत रखा गया था। हालांकि, उन्होंने कहा कि एमएसएमई के बैंक खातों में कमी आई है और इसमें सुधार की जरूरत है।


Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com