यह ख़बर 11 मई, 2011 को प्रकाशित हुई थी

'नौ प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करना संभव नहीं'

खास बातें

  • मुखर्जी ने कहा कि जिंसों के दाम में तेजी के चलते चालू वित्त वर्ष में 9 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं होगा।
New Delhi:

वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी ने बुधवार को कहा कि वैश्विक बाजार में जिंसों के दाम में तेजी के चलते चालू वित्त वर्ष में 9 प्रतिशत आर्थिक वृद्धि दर का लक्ष्य हासिल करना संभव नहीं होगा। हालांकि, उन्होंने कहा कि इस दौरान मुद्रास्फीति घटकर 7 से 7.5 प्रतिशत के स्तर पर आ जाएगी जो फिलहाल नौ प्रतिशत के आसपास है। यहां भारतीय आर्थिक सेवा के परिवीक्षकों (प्रोबेशनर्स) को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने कहा, अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिंसों की कीमतों में उतार-चढ़ाव और आपूर्ति में बाधाओं के चलते नौ प्रतिशत अथवा इससे 0.25 प्रतिशत कम या ज्यादा की वृद्धि दर हासिल करना संभव नहीं होगा। वर्ष 2010-11 के दौरान देश की आर्थिक वृद्धि दर 8.6 प्रतिशत रही। कीमत वृद्धि के संदर्भ में मंत्री ने कहा, मुद्रास्फीति घटकर 7 से 7.5 प्रतिशत के दायरे में आने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि मार्च में मुद्रास्फीति 8.98 प्रतिशत रही, जबकि 16 अप्रैल को समाप्त सप्ताह में खाद्य मुद्रास्फीति 8.76 प्रतिशत रही। मुद्रास्फीति को काबू में रखने के लिये रिजर्व बैंक लगातार प्रयास करता रहा है। पिछले एक साल में वह आठ बार रेपो और रिवर्स रेपो दरें बढ़ा चुका है। इसी महीने की शुरुआत में भी उसने रेपो और रिवर्स रेपो दर में आधा प्रतिशत की एक बार और वृद्धि की है। मुखर्जी ने कहा कि 9 से 10 प्रतिशत की आर्थिक वृद्धि दर हासिल करने के लिए भारत के समक्ष सबसे बड़ी चुनौतियों में राजकोषीय घाटे पर काबू पाना और मुद्रास्फीति के रुख में नरमी लाना है।


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