खास बातें
- भारत का कहना है कि विकसित देशों की नियामक संस्थाओं की ढिलाई के कारण ज्यादा कमाई करने के ध्येय से बड़े पैमाने पर धनराशि जिंस बाजार में लगाई गई।
हनोई: भारत ने खाद्य वस्तुओं और ईंधन कीमत में वृद्धि के लिए धनी देशों को बुधवार को जिम्मेदार ठहराया। भारत का कहना है कि विकसित देशों की नियामक संस्थाओं की ढिलाई के कारण ज्यादा कमाई करने के ध्येय से बड़े पैमाने पर धन राशि जिंस बाजार में लगायी गई। वित्तमंत्री प्रणव मुखर्जी ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिंसों की कीमत में वृद्धि का विश्लेषण केवल आपूर्ति या मांग के जरिए नहीं किया जा सकता। उन्होंने इस मामले में एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से और होमवर्क करने को कहा। एडीबी की सालाना बैठक के दौरान दक्षेस (दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन) के वित्त मंत्रियों की बैठक को संबोधित करते हुए मुखर्जी ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमत नियामकों की अयोग्यता का नतीजा है और विकसित देशों की मौद्रिक नीति वैश्विक जिंस बाजार में उच्च रिटर्न के मकसद से बड़े पैमाने पर वित्तीय प्रवाह को रोकने में विफल रही। मुखर्जी ने कहा कि ये वित्तीय तत्व दुनिया को विशेषकर गरीबों को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा, हमें इन बाजारों के मामले में बेहतर प्रशासन तथा नियामकीय निगरानी की जरूरत है। एक अलग बैठक में एडीबी के अध्यक्ष हारूहिको कुरोदा ने कहा कि एशिया को वैश्विक मौद्रिक तथा वित्तीय स्थिति को बढ़ावा देने के लिए बहुपक्षीय मसौदे को तैयार करने के मामले में ज्यादा सक्रिया भूमिका के जरिये वैश्विक आर्थिक तथा वित्तीय मामलों में ज्यादा जिम्मेदारी निभानी चाहिए।