यह ख़बर 24 मार्च, 2012 को प्रकाशित हुई थी

तरीका कोई भी हो गरीबी तो कम हुई है : मोंटेक

खास बातें

  • गरीबी रेखा के ताजा अनुमान को लेकर आलोचना झेल रहे योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने जोर देकर कहा कि इससे कोई अंतर नहीं पड़ता है कि कौन सा तरीका अपनाया गया है, यह सच्चाई है कि देश में गरीबों की संख्या कम हुई है।
भोपाल:

गरीबी रेखा के ताजा अनुमान को लेकर आलोचना झेल रहे योजना आयोग के उपाध्यक्ष मोंटेक सिंह अहलूवालिया ने जोर देकर कहा कि इससे कोई अंतर नहीं पड़ता है कि कौन सा तरीका अपनाया गया है, यह सच्चाई है कि देश में गरीबों की संख्या कम हुई है।

अहलूवालिया ने कहा, ‘आप जो भी गरीबी रेखा चुनें... मुद्दा यह है कि देश में गरीबी कम हुई है। कुछ लोगों ने कहा कि यह सही नहीं है... गरीबी कम नहीं हो रही है... मैं इस विचार को खारिज करता हूं... मैं स्पष्ट रूप से कहता हूं कि आप जिस भी संकेतक का उपयोग करें देश में हालात बेहतर हो रहे हैं।’

तेंदुलकर समिति के फार्मूले के आधार पर आयोग के अनुमान के मुताबिक गरीबी का अनुपात 2009-10 में घटकर 29.8 फीसद रह गया जो 2004-05 में 37.2 फीसद था। लेकिन यह अनुपात शहरी इलाकों में 28.65 रुपये और ग्रामीण इलाकों में 22.42 रुपये प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की खपत के विवादास्पद आधार पर निकाला गया। उन्होंने यह भी कहा कि 28.65 रुपये की गरीबी रेखा सरकार की सामाजिक क्षेत्र की कल्याण योजनाओं से नहीं जुड़ेगी।

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ट्राइडेंट समूह की कपड़ा इकाई के लिए भूमिपूजन समारोह में पहुंचे अहलूवालिया ने कहा, ‘तेंदुलकर समिति की गरीबी रेखा बेहद तर्कसंगत है। आज हमारी वृद्धि की रफ्तार तेज है।’ योजना आयोग ने इस सप्ताह गरीबी रेखा के नए आंकड़े पेश किए। इसके बाद अहलूवालिया संसद के अंदर और बाहर निशाने पर रहे। समाजवादी पार्टी के प्रमुख मुलायम सिंह यादव ने उन्हें हटाने तक की मांग कर दी थी।