खास बातें
- पीएमईएसी के चेयरमैन ने कहा, यदि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहता है तो यह चिंता की बात है।
चेन्नई: प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (पीएमईएसी) ने कहा लीबिया में संकट की वजह से यदि कच्चे तेल के दाम 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर बने रहते हैं, तो ईंधन की कीमतों में बढ़ोतरी तय है। पीएमईएसी के चेयरमैन सी रंगराजन ने एक कार्यक्रम के मौके पर संवाददाताओं से कहा, यदि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल पर बना रहता है, तो यह चिंता की बात है। इसके लिए हमारी ओर से कुछ किए जाने की जरूरत है। पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों में कुछ वृद्धि को रोक पाना संभव नहीं होगा। रंगराजन ने कहा कि भारत के लिए प्रमुख चिंता की वजह कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी है। हम कुछ सप्ताह तक और देखना चाहेंगे कि इसका क्या असर पड़ता है। खाद्य मुद्रास्फीति के बारे में पूछे जाने पर रंगराजन ने कहा कि इसमें मार्च से गिरावट आने लगेगी। उन्होंने कहा, फरवरी के दूसरे सप्ताह से सब्जियों की कीमतों में गिरावट का कुछ प्रभाव दिखाई दिया है। इसलिए फरवरी के आंकड़ों में भी सब्जियों की कीमतों में कमी का पूरा असर दिखाई नहीं देगा। मार्च के आंकड़ों में इसका असर दिखेगा। मार्च में मुद्रास्फीति में तेज गिरावट आ सकती है।यह पूछे जाने पर कि क्या सरकार डीजल की कीमतों को नियंत्रणमुक्त करेगी, उन्होंने कहा कि इसके लिए नीति में बदलाव की जरूरत होगी। मैं पहले ही कह चुका हूं कि इसके लिए कोई नीतिगत कार्रवाई करनी होगी। रंगराजन ने संकेत दिया कि सरकार विशेष आर्थिक क्षेत्रों (सेज) में कंपनियों को न्यूनतम वैकल्पिक कर (मैट) से छूट नहीं देगी। मैट में कंपनियों को बुक-प्राफिट पर न्यूनतम कर जरूर चुकाना पड़ता है।