खास बातें
- 2-जी घोटाले पर हुई पीएसी की बैठक हंगामे के बाद ख़त्म हो गई। रिपोर्ट को लेकर अध्यक्ष मुरली मनोहर जोशी कानूनी सलाह लेंगे।
New Delhi: 2-जी स्पेक्ट्रम घोटाले में संसद की लोक लेखा समिति (पीएसी) की अस्वीकृत रिपोर्ट को पुनर्गठित लोक लेखा समिति के समक्ष पेश करने की भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) नेता मुरली मनोहर जोशी की कोशिश को कांग्रेस और उसके सहयोगी दलों के सदस्यों ने नकाम कर दिया है। अस्वीकृत रिपोर्ट में 2-जी मामले में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और केंद्रीय गृहमंत्री पी. चिदम्बरम की भूमिका को लेकर सवाल उठाए गए हैं। सूत्रों ने बताया कि सरकार के खर्चों का लेखा-जोखा रखने वाली इस समिति के अध्यक्ष जोशी ने नवगठित समिति की बैठक में इस रिपोर्ट को रखने का प्रयास किया था लेकिन जयंती नटराजन के नेतृत्व में कांग्रेस सदस्यों ने इसका विरोध किया। कांग्रेस सदस्यों का कहना था कि यह रिपोर्ट पहले ही खारिज की जा चुकी है और इसे दोबारा पेश करने से पहले इसे फिर से तैयार किया जाना जरूरी है। मंगलवार सुबह 11.30 बजे शुरू हुई समिति की बैठक दोपहर दो बजे तक जारी थी। जोशी ने रिपोर्ट पेश किए जाने के मुद्दे पर सदस्यों में सहमति बनाने की कोशिश की। बीते 30 अप्रैल को भंग हुई पूर्व समिति ने इसे अस्वीकृत कर दिया था। नवगठित समिति के कांग्रेसी सदस्यों का कहना है कि संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) पहले ही 2-जी घोटाले की जांच कर रही है और इसलिए पीएसी को इस मुद्दे में शामिल होने की आवश्यकता नहीं है। जोशी ने यह रिपोर्ट तैयार की थी और 30 अप्रैल को इसे लोकसभा अध्यक्ष मीरा कुमार के कार्यालय में आनन-फानन को सौंप कर दिया था। दूसरी ओर इससे दो दिन पहले ही समिति के सदस्यों ने बहुमत से इसे अस्वीकृत कर दिया था। मीरा कुमार ने रिपोर्ट यह कहते हुए लौटा दी थी कि इसे समिति का बहुमत प्राप्त नहीं है। रिपोर्ट में मनमोहन सिंह व चिदम्बरम का नाम था। साल 2007-08 में जब यह घोटाला हुआ था तब चिदम्बरम वित्त मंत्री थे। उस वक्त मोबाइल सेवा के लिए रेडियो तरंगों के इस्तेमाल के लिए लाइसेंस आवंटित करने में कथित अनियमितताएं बरती गई थीं। जेल में बंद पूर्व सूचना प्रौद्योगिकी एवं संचार मंत्री ए. राजा को बाजार मूल्य से कम मूल्य में लाइसेंस बेचने का आरोपी पाया गया। इससे देश को 1.76 लाख करोड़ रुपये के राजस्व का नुकसान हुआ था।